शाहजहांपुर। संपत्ति के विवाद में चाचा सोनू और भतीजे गोलू की गोली मारकर हत्या करने के दोषी दो सगे भाइयों को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। दोषी युवक सोनू के सौतेले भतीजे हैं।
निगोही कस्बे के रहने वाले रामकृष्ण ने पहली पत्नी की मौत के बाद दूसरी शादी की। रामकृष्ण की पहली पत्नी से दो बेटे दिनेश और राकेश थे। दूसरी पत्नी से सोनू पैदा हुआ। सोनू की पत्नी उसे छोड़कर चली गई थी। वह मकान में अकेले रहता था। वहीं, सोनू के सौतेले भाई राकेश ने आत्महत्या कर ली थी।
राकेश की मौत के बाद उसकी पत्नी आरती अपने बेटे गोलू और बेटी रुपाली के साथ सोनू के पास रहने लगे। दिनेश के बेटे संतोष और आशुतोष को लगता था कि उसके चाचा राकेश की संपत्ति पर सोनू कब्जा कर लेगा। इस बीच आरती की एक सड़क हादसे में मौत हो गई। सोनू ही गोलू और रुपाली का पालन-पोषण कर रहा था।
रुपाली के मामा पुवायां के हरदयाल कूंचा मोहल्ले के रहने वाले श्यामबाबू ने निगोही थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। उन्होंने बताया था कि 21 अप्रैल 2017 की सुबह 13 वर्षीय गोलू मकान के अंदर सो रहा था। नौ वर्षीय रुपाली स्कूल गई हुई थी। तभी पड़ोस में रहने वाले दिनेश, उसके बेटे संतोष और आशुतोष ने सोनू और गोलू की गोली मारकर हत्या कर दी।
पुलिस ने तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विवेचना की। विवेचना के बाद आरोपपत्र अदालत भेजा। अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और साक्ष्यों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश शिवकुमार-तृतीय ने संतोष और आशुतोष को दोषी माना। दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।