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अब गर्रा और खन्नौत नदी के किनारे भी होगा कछुआ संरक्षण

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गोरा रायपुर में कछुओं के अंडे संरक्षित करने को बनी हेचरी - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। कछुआ संरक्षण के लिए वन विभाग ने एक कदम और बढ़ाया है। अब गर्रा व खन्नौत नदी के किनारे भी कछुआ संरक्षण किया जाएगा। इसमें सहयोग के लिए विभाग ने कछुआ मित्र नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब तक सिर्फ रामगंगा नदी किनारे कछुआ संरक्षण किया जा रहा था। यहां गांव गोरा रायपुर में कछुए के अंडे संरक्षित करने के लिए हैचरी भी स्थापित की जा चुकी है।
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डीएफओ आदर्श कुमार ने बताया कि वन विभाग की ओर से जलालाबाद रेंज के गांव गोरा रायपुर में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से हैचरी की स्थापना की गई है। इसमें कछुओं के अंडों को संरक्षित किया जाता है। इसके लिए ग्रामीणों से सहयोग लिया जा रहा है। अंडों से कछुए निकलने के बाद इन्हें सदर रेंज कार्यालय में बने कछुआ संरक्षण केंद्र में विकसित होने तक रखा जाता है। इसके बाद इन्हें पुन: रामगंगा नदी में छोड़ दिया जाता है।
अब वन विभाग की ओर से जनपद की गर्रा एवं खन्नौत नदी के किनारे भी कछुओं का संरक्षण किया जाएगा। विभागीय टीम की ओर से ग्रामीणों से संपर्क कर मुहिम में सहयोग की अपील की जा रही है। जो इस मुहिम में साथ देंगे, उन्हें कछुआ मित्र के तौर पर नियुक्त किया जाएगा। अति शीघ्र दोनों नदियों के किनारे हैचरी स्थापित करने की योजना है।
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रिवर क्लीनर के रूप में काम करता है कछुआ
कछुआ नदियों के लिए बेहद लाभप्रद माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक कछुआ नदी की गंदगी को खाकर उसे साफ करता है। ऐसा माना जाता है कि यदि नदी में कछुओं की संख्या ज्यादा है तो उस नदी का जल बेहद स्वच्छ होगा। नदी को प्रदूषण मुक्त करने में कछुआ अहम योगदान निभाता है।
इस तरह से होता है संरक्षण
ग्रामीणों व वनकर्मी कछुआ के अंडों को हैचरी में लाकर संरक्षित करते हैं। लगभग दो से तीन माह में अंडों से शिशु कछुआ बाहर आ जाते हैं। उन्हें कछुआ संरक्षण केंद्र में रखा जाता है। गोरा रायपुर के हैजरी में वर्तमान में 108 अंडे संरक्षित हैं। लगभग 500 कछुओं को रामगंगा नदी में छोड़ा जा चुका है।
आज गोरा रायपुर में होगी विचार गोष्ठी
डीएफओ ने बताया कि सोमवार को विश्व कछुआ दिवस के अवसर पर जलालाबाद रेंज के गांव गोरा रायपुर में संगोष्ठी होगी। इसमें ग्रामीणों से कछुआ संरक्षण में अपील के साथ कछुए के महत्व व नदियों की सफाई में उनकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला जाएगा। उन्होंने अधिक संख्या में उपस्थित होने की अपील की है।

सदर क्षेत्र में कछुओं के संरक्षण को बना केंद्र- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

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