शाहजहांपुर। सिंचाई विभाग 15 जून से मानसून सीजन की शुरुआत मानता है, इसलिए शासन से प्रदेश की सभी नदियों पर बने पैंटून पुल हटाने के आदेश जारी हो चुके हैं। इस पर अमल होने की दशा में कोलाघाट समेत परौर क्षेत्र में रामगंगा के हैदलपुर घाट के पैंटून पुल हटे तो कटरी क्षेत्र के लोगों का जिला मुख्यालय तक आवागमन कठिन हो जाएगा। उन्हें करीब 70 किमी का चक्कर काट कर मिर्जापुर से जरियनपुर-अल्हागंज होते हुए जलालाबाद आना-जाना होगा जबकि यह मार्ग पहले से ही जर्जर होने के कारण भारी वाहनों के चलने लायक नहीं है।
गत वर्ष 29 नवंबर को कोलाघाट का पक्का पुल एक पिलर जमीन में धंस जाने से टूटकर तीन भागों में बट गया था। इससे कलान और मिर्जापुर क्षेत्र के लोगों को जिला मुख्यालय तक जाने के लिए जरियनपुर से अल्हागंज तक 50 किमी और अल्हागंज से जलालाबाद तक 20 किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ी जबकि जरियनपुर से कोलाघाट पुल होकर जलालाबाद की दूरी मात्र दस किमी है। लोगों की इसी दिक्कत को देखते आवागमन की तात्कालिक सुविधा देने के लिए कोलाघाट पर पैंटून पुल बनाया गया, लेकिन अब उसे मानसून सीजन के लिए हटाने का वक्त नजदीक आ गया है।
लोनिवि के सहायक अभियंता ने एक्सईएन की ओर से जलालाबाद की एसडीएम और सीओ को इसी आशय का पत्र भेजकर आम जनमानस को अवगत कराने का आग्रह किया है। हालांकि, अभी रामगंगा नदी में पानी बहुत कम है। आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि पुल के अधिकांश पैंटून पानी में तैरने के बजाय जमीन पर रखे हुए हैं और ऐसी स्थिति में पैंटून पुल अभी हटाने की जरूरत नहीं है। क्षेत्रवासियों ने लोनिवि मंत्री जितिन प्रसाद से रामगंगा में बाढ़ आने की पूर्व सूचना पर ही कोलाघाट पैंटून पुल हटवाने की अनुमति देने का अनुरोध किया है।
क्षतिग्रस्त पुल की जांच को डेढ़ करोड़ से अधिक स्वीकृत
शाहजहांपुर। कोलाघाट के क्षतिग्रस्त पक्के पुल की जांच के लिए एक करोड़ 54 लाख 43 हजार रुपये की धनराशि शासन ने स्वीकृत कर दी है। साथ ही पहली किस्त के रूप में 54 लाख, 43 हजार की धनराशि राज्यपाल ने सशर्त अवमुक्त करने की अनुमति भी प्रदान कर दी है। संवाद
अभियंताओं की बात
जिले की नदियों में पानी जुलाई अंत अथवा अगस्त में बढ़ना शुरू होता है। इसलिए कोलाघाट से निकट भविष्य में पैंटून पुल हटाने की कोई योजना नहीं है। -सुनील कुमार भास्कर, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
जिले के पैंटून पुल हटाने का अभी निर्णय नहीं किया है, क्योंकि नदियों में अभी बहुत कम पानी है। सिंचाई विभाग से लगातार संपर्क रखा जा रहा है। वहां के नियंत्रण कक्ष को जैसे ही उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी के बांधों-बैराजों से नदियों में अतिरिक्त पानी निकासी की सूचना मिलेगी, तभी पैंटून पुल हटाने का काम शुरू कराया जाएगा। -राजेश चौधरी, अधिशासी अभियंता, लोनिवि (निर्माण खंड-1)