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187 कछुओं को रामगंगा नदी में छोड़ा

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रामगंगा नदी में कछुआ केशव को छोड़ते एडीएम राजस्व और डीएफओ । संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। कछुआ संरक्षण की मुहिम के तहत वन विभाग की सदर रेंज में स्थित कछुआ संरक्षण केंद्र में संरक्षित किए गए 187 कछुओं को रामगंगा नदी में छोड़ा गया। इस दौरान एक विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। जिसमें कछुओं के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
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कछुआ संरक्षण के लिए वन विभाग ने मुहिम चलाई है। इसके लिए वन विभाग की जलालाबाद रेंज के रामगंगा नदी के किनारे बसे गांव गोरा रायपुर में एक अस्थायी हैचरी की स्थापना की गई है। इस हैचरी में गांव वालों के सहयोग से कछुओं के अंडों को संरक्षित किया जाता है। जब इनमें से बच्चे बाहर आ जाते हैं तो उन्हें वन विभाग की सदर रेंज में स्थित कछुआ संरक्षण केंद्र में रखा जाता है। शुक्रवार को संरक्षण केंद्र में विकसित हुए कुल 187 कछुओं के बच्चों को रामगंगा नदी में छोड़ा गया। गांव गोरा रायपुर में हुए कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी एवं प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान एक विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। इस मौके पर एडीएम वित्त एवं राजस्व गिरिजेश कुमार चौधरी ने कहा कि प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए प्रत्येक जीव का विशेष महत्व है। कछुआ पारिस्थितिकी तंत्र में क्लीनर के रूप में जाना जाता है। कछुआ नदी एवं नदी किनारे पड़े मृत जानवरों के अवशेषों को खाकर प्रकृति को स्वच्छ बनाए रखता है। डीएफओ आदर्श कुमार ने बताया कि कछुआ संरक्षण के लिए वन विभाग ने विशेष मुहिम चलाई है। इसके लिए हैचरी की स्थापना की गई है। अधिक से अधिक ग्रामीण इस अभियान से जुड़ें और प्रकृति को स्वच्छ बनाए जाने में सहयोग प्रदान करें। इस मौके पर वन क्षेत्राधिकारी जलालाबाद समेत वन कर्मी एवं ग्रामीण मौजूद रहे।
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