शाहजहांपुर। बोगस फर्म बनाकर 10.78 लाख रुपये की ठगी के मामले में खुलासा हुआ है कि कुछ लोग एक जगह बैठकर अलग-अलग जगह की बोगस फर्म बना लेते थे। इसमें आम लोगों की आईडी का इस्तेमाल किया जाता था और केवल एक ओटीपी प्राप्त कर जीएसटी में पंजीकरण की आसान प्रक्रिया का फायदा उठाते हुए फर्म बना ली जाती थीं। जांच में फर्म का सही पता नहीं लग पाता था। ठगी में शामिल गिरोह ने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, हैदराबाद में अलग-अलग फर्म की चेन बनाकर ठगी की घटना को अंजाम दिया।
जीएसटी पंजीयन में सरल प्रक्रिया होने का फायदा जालसाज उठाने लगे हैं। जालसाज फर्जी फर्म बनाने के लिए अनजान लोगों की आईडी का इस्तेमाल करते हैं। लोगों से किसी बहाने ओटीपी पूछकर उनके खाते पर जीएसटी फर्म का पंजीयन कर लेते हैं। इनका नेटवर्क बढ़े स्तर पर फैला हुआ है।
इसमें अलग-अलग प्रदेश के लोग शामिल हैं। इनका रिकाॅर्ड राज्यकर कार्यालय में नहीं होता। इसी आधार पर ये लोग कर चोरी को अंजाम देते हैं। -
चेन बनाकर बोगस फर्म बनाने का होता है काम
बोगस फर्म बनाने वाले ठग चेन बनाकर काम करते हैं। इनके तार कई राज्यों से जुड़े हैं। यह बोगस फर्म के नाम पर व्यापार करते हैं जिसका राज्यकर कार्यालय में कोई लेखाजोखा नहीं होता। इसलिए इनको चिह्नित करना काफी मुश्किल हो जाता है। बोगस फर्म बनाने वाला गिरोह सरकार को करोड़ों का चूना लगा रहा है। यह लोग आम लोगों को लालच देकर अपने चंगुल में फंसा लेते हैं।
जीएसटी पंजीयन की सरल प्रक्रिया का जालसाज फायदा उठा रहे हैं। ये लोग आम लोगों की फर्म के नाम पर व्यापार करते हैं। आम लोग इनके लालच में आकर ओटीपी नंबर बता देते हैं। इससे ये आसानी से कर चोरी कर लेते हैं। आम लोगों को सजग रहने की जरूरत है।
- परवेश तोमर, सहायक उपायुक्त, राज्यकर