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मशहूर बांसुरी वादक उस्ताद शफायत खां नहीं रहे

Wed, 01 Mar 2017 10:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो तिलहर। 
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सुपुर्दे खाक - फोटो : अमर उजाला
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बॉलीवुड की नामचीन हस्तियों के बीच पहचान बनाने वाले कलाकार सुपुर्दे खाक
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बॉलीवुड में पुरानी जानीमानी हस्तियों के बीच अपनी बांसुरी (किलार्नेट) वादन से खासी शोहरत हासिल करने वाले 82 वर्षीय उस्ताद शफायत खां अब नहीं रहे। लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। बुधवार को उन्हें सुपुर्दे खाक कर दिया गया।
नगर के मोहल्ला घेरचौवा में गुमनामी की जिंदगी जी रहे बांसुरी (किलार्नेट) वादन से 50 के दशक में खासी शोहरत कमाने वाले महरूम उस्ताद शफायत खां के बेटे नदीम अहमद खां ने बताया कि उनके वालिद ने लता मंगेशकर, किशोर कुमार आदि कई नामचीन गायकों के गानों की धुनों को किलार्नेट पर बजाया। पृथ्वीराज कपूर की भांजी की शादी में भी उन्होेंने ‘डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली’ व ‘ बाबुल की दुआएं लेती जा’ गीतों की धुने बजाकर खूब शोहरत पाई। बताया कि 1959 में मुंबई पहुंचे शफायत खां ने शहनाई वादक उस्ताद बिसमिल्लाह खां से मिलकर संगीत के कुछ गुर सीखे तथा उनके प्रोग्रामों में रागभैरवी पर गाए ‘दिल का खिलौना हाय टूट गया’ की धुन जरूर सुनाते।
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कुछ वर्षों तक मुंबई में रहने के बाद तिलहर लौटने पर उन्होंने खुद का इनायत बैंड बनाया जिसने खूब शोहरत पाई। वर्ष 2002 में गिर जाने के कारण उनका एक पैर फ्रैक्चर हो गया। नगर के मोहल्ला घेरचौवा में ससुराल में गुमनामी की जिंदगी जी रहे बैसाखियाें के सहारे चलने फि रने वाले उस्ताद शफायत खां बीते कुछ समय से बीमारी की चपेट में थे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि ‘अब खुदा के घर जाकर ही बांसुरी बजाऊंगा।’ यह उनके अंतिम शब्द थे। गमगीन माहौल में आज सुपुर्दे खाक के दौरान तमाम गणमान्यजनों ने उन्हें अश्रुपूरित विदाई दी।
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