पुवायां। डीएम के निर्देश पर लघु सिंचाई अभियंता शाहजहांपुर सुनील पाल ने सोमवार को विभागीय जेई के साथ भैंसी नदी में शारदा नहर के सीपेज (रिसाव) के पानी को लाने के लिए गहलुइया और लुहिची में निरीक्षण किया।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी जिलों में सूखी पड़ी एक-एक नदी को पुनर्जीवित करने का आदेश दिया था। इसके तहत शाहजहांपुर में गोमती की सहायक नदी भैंसी का चयन किया गया है। 15 वर्ष से सूखी पड़ी भैंसी नदी को फिर से सदानीरा बनाने के लिए इस समय खोदाई का काम चल रहा है।
खोदाई में कहीं-कहीं जलस्रोत भी निकल रहे हैं। नदी की खोदाई के साथ ही आसपास के तालाबों की भी पैमाइश की जाएगी। इससे तालाबों के जलस्रोतों से भी नदी काे पानी मिल सके। भैंसी नदी के उद्गम स्थल भैंसार झील के पास से सीपेज का पानी नदी में लाने के लिए चेक डैम बनाने की भी तैयारी है।
लघु सिंचाई विभाग के अभियंता के साथ टीम ने उस स्थान का सर्वे किया, जहां से रिसाव के पानी की धारा को मोड़ कर भैंसी नदी की ओर लाया जा सके। सुनील पाल ने बताया कि सर्वे के बाद प्लान बनाकर डीएम को रिपोर्ट दी जाएगी। इस मौके पर राजीव सिंह, संजय त्रिपाठी, सुधीर सिंह, देवेश गंगवार, राजदीप सिंह आदि स्वयंसेवक भी मौजूद रहे। संवाद
बंडा से लेकर पुवायां तक कई गांवों के किसानों को मिलेगा लाभ
भैंसी नदी में जलधार बहने से बंडा से पुवायां तक लगभग 38 किमी क्षेत्र में नदी किनारे खेती करने वाले किसानों को सिंचाई आदि की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा नदी किनारे पौधरोपण होने से पर्यावरण संरक्षण होगा और नदी भूमि पर कब्जे भी रुक सकेंगे। भैंसी नदी के पुनर्जीवित होने का सबसे बड़ा लाभ आदिगंगा के नाम से मशहूर गोमती नदी को भी मिलेगा और गोमती में पानी बढ़ सकेगा।
33 जेसीबी से हुआ खोदाई का काम
सोमवार को 33 जेसीबी से नदी की खोदाई काम देर शाम तक चलता रहा। 17 जेसीबी बंडा क्षेत्र और 16 जेसीबी पुवायां क्षेत्र में खोदाई में लगी रहीं। कई स्थानों पर किसानों की मांग पर लेखपालों ने पैमाइश कर नदी की भूमि को चिह्नित किया। उद्गम स्थल बंडा के कमालपुर की भैंसार झील से लेकर पन्नघाट में भैंसी नदी के गोमती में मिलने के स्थान तक लोकभारती के कार्यकर्ता और तमाम स्वयंसेवक भी खोदाई कार्य की निगरानी करते रहे। निगरानी कार्य में लेखपाल, पंचायत सहायक, रोजगार सेवक भी लगे रहे।