72825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के तहत जिले में सभी ब्लाकों में करीब 2500 प्रशिुक्षओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बीआरसी पर अव्यवस्थाओं की शिकायतों पर ध्यान देते हुए Òअमर उजालाÓ की टीम ने ददरौल बीआरसी पर पहुंचकर वहां की अव्यवस्थाओं पर नजर डाली तो प्रशिक्षुओं की शिकायतें सही साबित हुईं।
बुधवार सुबह 10:40 बजे ‘अमर उजालाÓ टीम ने ददरौल बीआरसी में प्रवेश किया तो देखा कि एक कक्ष के सामने मिट्टी के दो घड़े प्रशिक्षुओं को पानी पिलाने के लिए रखे हुए थे। इस बारे में प्रशिक्षुओं ने कहा कि इन घड़ों में पानी कभी ठंडा नहीं मिलता। प्यास लगने पर बीआरसी में लगा हैंडपंप ही काम में आता है। वहीं कक्ष में अंदर जाने पर देखा कि कुछ प्रशिक्षु बायोमैट्रिक अटेंडेंस यंत्र पर अटेंडेंस लगा रहे हैं। साथ ही यह भी चर्चा करते मिले कि अंगूठे कोई लगाता है और नाम किसी दूसरे का लिखकर आता है।
अंदर एक कक्ष में गेट के बाहर तक प्रशिक्षु शिक्षक जमीन पर खचाखच बैठे हुए हैं। एक कक्ष में 110 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जबकि उस कक्ष में अधिकांश 70 लोगों को बैठाया जा सकता है। जेनरेटर चलाकर पंखे जरूर चलाए जा रहे, लेकिन गर्मी से राहत नहीं मिल रही। प्रशिक्षु गर्मी से लथपथ नजर आ रहे थे। वहीं प्रशिक्षण के दौरान दिया जाने वाला नाश्ता तैयार नहीं कराया गया।
वहीं, बोर्ड के सामने बैठे एबीआरसी प्रेमपाल गंगवार और रामशंकर यादव प्रशिक्षुओं को प्रार्थना करवा रहे हैं। इसके बाद वहां पर प्रशिक्षण कार्य शुरू होता है। प्रशिक्षण में सबसे पहले एक दिन पूर्व के बारे में घटित घटनाओं के बारे में बताया जाता है। इसके साथ ही समाचार पत्र की कटिंग लगाकर विभिन्न समाचारों के बारे में बताया जाता है। इसके बाद रूटीन प्रशिक्षण शुरू होता है। इस दौरान प्रशिक्षुओं से उन लोगों को हो रही समस्याओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने अपनी परेशानियां बयां की।
प्रशिक्षु शिक्षकों की समस्याएं उन्हीं की जुबानीं...
बैठने में हो रही परेशानी
अल्का गोयल का कहना है कि दो कक्षों में 210 लोग बैठाए जा रहे हैं, जबकि एक कक्ष में 50 से 70 लोगों के बैठने की जगह है। इससे बहुत परेशानी होती है।
जलपान की व्यवस्था कराई जाए
सोनल शर्मा और राजेश प्रजापति का कहना है कि ददरौल बीआरसी शहर से दूर होने की वजह से यहां कुछ खाने को नहीं मिलता है। जलपान की व्यवस्था कराई जाए।
सात से दो बजे हो प्रशिक्षण का समय
मनोज शर्मा और भावना शर्मा कहती हैं कि विद्यालय का समय सुबह सात बजे से दोपहर दो बजे तक किया जाए। आठ से तीन बजे में भी समस्या हो रही है।
प्रशिक्षण में एक घंटे की मिले छूट
नीलम वर्मा और निधि कहती हैं कि प्रशिक्षण में एक घंटे की छूट देनी चाहिए। साथ ही प्रशिक्षण का समय सात बजे से दोपहर एक बजे तक किया जाए।
शौचालय रहता है बहुत गंदा
निशा रानी का कहना है कि परिसर के साथ ही शौचालय बहुत गंदा रहता है। भीषण गर्मी में गंदगी की वजह से बैठना मुश्किल हो रहा है।
सुबह सात से एक बजे तक हो प्रशिक्षण
गौरव शुक्ला और सुरेंद्र प्रजापति ने भी एक घंटे की छूट की मांग करते हुए प्रशिक्षण समय सात बजे से लेकर दोपहर एक बजे तक करने की बात कही।
बीआरसी पर उपलब्ध कराएं मेडिसिन
प्रशिक्षु निशा ने कहा कि भीषण गर्मी और अव्यवस्थाओं की वजह रोजाना कोई न कोई प्रशिक्षु बीमार हो जाता है। इसलिए यहां पर फस्र्ट एड के साथ मेडिसिन मुहैया कराई जाए।
व्यवस्थाओं में हो सुधार
कामिनी सिंह और शालू कहती हैं कि कक्षों में अधिक लोग बैठने और अव्यवस्थाओं के चलते ही लोग बीमार हो रहे हैं। इसलिए व्यवस्थाओं में सुधार कराया जाए।
भीषण गर्मी में दो प्रशिक्षु और बीमार
72825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती के तहत जिले में 16 ब्लाकों में प्रशिक्षण चल रहा है। बुधवार को ददरौल ब्लाक में प्रशिक्षण में अव्यवस्थाओं के चलते दो प्रशिक्षु शिक्षक बीमार हो गईं। वहां पर फर्स्ट एड एवं अन्य कोई व्यवस्था न होने पर उन लोगों को काफी परेशानी हुई। बीमार हुईं प्रशिक्षु शिक्षक कामिनी सिंह और शालू बीमार हो गईं। इसके बाद साथी प्रशिक्षुओं ने एक खाली पड़े बरामदे में हाथ वाला पंखा झला एवं पानी पिलाया। वहीं कुछ प्रशिक्षुओं के पास मिले इलेक्ट्रॉल एवं अन्य दवाइयां खिलाईं।
दुधमुंहे बच्चे भी हो रहे परेशान
प्रशिक्षण प्राप्त कर रही कई प्रशिक्षु शिक्षकाओं के साथ उनके नन्हें-मुन्ने बच्चों के साथ ही दुधमुंहे बच्चे भी आते हैं। भीषण गर्मी में खचाखच भरे प्रशिक्षण हाल में बच्चों को लेकर बैठ पाना काफी मुश्किल है। इससे महिला प्रशिक्षु शिक्षकाएं पहुंच तो रही हैं, लेकिन मजबूरी में बच्चों को गर्मी से राहत देने के लिए दूसरे बरामदे में बैठ रही हैं।
खंड शिक्षा अधिकारी अवकाश पर हैं
ददरौल ब्लाक के खंड शिक्षा अधिकारी भगवान राव प्रशिक्षण के दौरान मौके पर मौजूद नहीं मिले। इस संबंध में पूछ जाने पर एक एबीआरसी ने कहा कि वह अवकाश पर हैं। पूछा कब तक आएंगे तो इस संबंध में कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
एबीआरसी ने की जेनरेटर की व्यवस्था
मौके पर मिले एबीआरसी ने कहा कि प्रशिक्षण के लिए कोई धनराशि नहीं मिली है। कहा कि प्रशिक्षु शिक्षकों की परेशानी को देखते हुए जेनरेटर की व्यवस्था मिलकर कराई है। जलपान की धनराशि भी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में प्रशिक्षण कराना काफी चुनौतीपूर्ण है।