विदेशी धरती पर तीन स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाला विकलांग कौशलेंद्र फसली नुकसान का मुआवजा पानेे के लिए रोजाना तहसील के चक्कर काटकर परेशान है, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं। उसका आरोप है कि सुविधा शुल्क न देने के कारण उसे चेक नहीं दिया जा रहा।
कस्बे के मोहल्ला प्रतापनगर के रहने वाले कौशलेंद्र की गांव कोना याकूबपुर में जमीन है। इसी से उनके परिवार का भरण-पोषण होता है। वर्ष 1981 में कौशलेंद्र ने जापान में हुई विकलांग ओलंपिक व्हीलचेयर प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए तीन स्वर्ण पदक हासिल किए थे। बचपन में एक दुघर्टना का शिकार होकर पूरी तरह विकलांग कौशलेंद्र वर्षों से व्हील चेयर पर हैं।
कौशलेंद्र की अतिवृष्टि से गेहूं की सारी फसल बर्बाद हो गई, लेकिन उन्हें मुआवजे के रूप में सिर्फ 15 सौ रुपये का चेक दिया गया। उन्होंने उसे लेने से मना कर दिया। उनका कहना है कि परिवार के अन्य लोगों को सात-सात हजार के चेक दिए गए, जबकि जमीन सभी के पास बराबर है। नुकसान भी बराबर हुआ है, फिर उन्हें 15 सौ का चेक क्यों दिया जा रहा है। आरोप लगाया कि लेखपाल उनसे 20 प्रतिशत सुविधा शुल्क देने पर ही उतनी धनराशि का चेक देने की बात कह रहा है। बेरोजगार होने के कारण उनके पास देने को पैसे नहीं है। लेखपाल के चक्कर काट कर परेशान हो चुके कौशलेंद्र ने तहसीलदार को प्रार्थना पत्र देकर उचित क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की है।