शाहजहांपुर। शहर में प्रमुख सड़कों से लेकर वार्डों में स्ट्रीट लाइट पुरानी और खराब होने से रोशनी कम हो गई है। नगर निगम के पास इसको बदलने की फुर्सत नहीं है। निगम क्षेत्र अब तक स्ट्रीट लाइट की देखभाल की व्यवस्था ई-स्मार्ट कंपनी के पास थी। पिछले सप्ताह से नगर निगम ने ई-स्मार्ट कंपनी को सिर्फ साढ़े चार हजार लाइटों की जिम्मेदारी सौंपी है। इन लाइटों की देखरेख के लिए कंपनी को हर महीने 15 लाख रुपये दिए जाएंगे। बाकी लाइटों का रखरखाव नगर निगम करेगा।
नगर निगम क्षेत्र में करीब 16 हजार स्ट्रीट लाइट लगी हुईं हैं। नगर निगम की ओर से ई-स्मार्ट कंपनी को 2018 में शहर में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई थी। कंपनी को देखरेख के एवज में नगर निगम की ओर से 38 लाख रुपये का मासिक भुगतान किया जाता था। इतनी भारी भरकम राशि होने के बाद भी कंपनी ने नाममात्र के कर्मचारियों को स्ट्रीट लाइट व्यवस्था की देखरेख के लिए लगा रखा था।
नगर निगम में स्ट्रीट लाइट खराब होने की काफी शिकायत आ रहीं थीं। विरोध के चलते नगर निगम के अधिकारियों ने कंपनी का टेंडर निरस्त कर दिया था। शहर की प्रकाश व्यवस्था की जिम्मेदारी नगर निगम ने अपने ऊपर ले ली थी। बाद में अक्तूबर में पार्षदों के अनुमोदन पर फिर से उसी कंपनी को ठेका दे दिया गया। हालांकि अब ई-स्मार्ट कंपनी का कार्यक्षेत्र घटा दिया गया। 16 हजार लाइटों में मात्र साढ़े चार हजार लाइटों की जिम्मेदारी ई-स्मार्ट कंपनी के पास रह गई है।
खराब लाइट तो बदल दी जाती हैं, हल्की रोशनी वाली नहीं बदली जातीं
नगर निगम के अधिकतर पार्षदों का कहना है कि एलईडी लाइटों के लगने के बाद इन लाइटों की रोशनी धीमी हो गई है। कई जगहों पर तो स्थिति इतनी खराब है कि लाइट नाममात्र के लिए रह गईं हैं। कोहरे और बारिश में अंधेरे जैसी स्थिति रहती है। इन लाइटों को बदलने के लिए पार्षदों ने नगर आयुक्त के सामने मुद्दा रखा है। पार्षदाें का कहना है कि पांच साल बीतने के बाद भी लाइटों को नहीं बदला गया। इसकी समय-सीमा भी खत्म हो गई। उनकी बात पर अब तक सुनवाई नहीं हुई है।
सीमित संसाधनों से 11500 लाइटों की देखरेख
नगर निगम के पास 11500 स्ट्रीट लाइट की देखरेख के लिए 30 से 35 कर्मचारी हैं। सात स्काईअप वाहन हैं। इनमें एक खराब है। सीढ़ी वाली दो ठेली है। एक दिन में 20 से 25 शिकायतें आ जाती हैं। इनको सही करने के लिए संसाधन काफी सीमित हैं। वहीं, ई-स्मार्ट कंपनी के 12 कर्मचारियों पर लाइटों को ठीक करने की जिम्मेदारी है।
पार्षद और लोगों का दर्द
कई साल से स्ट्रीट लाइट लगी हुई हैं। इनकी लाइट बहुत हल्की हो गई है। इसकी वजह से अंधेरे में दिखाई नहीं देता है। इनको बदलने के लिए नगर निगम में कई बार शिकायत की गई, इसके बाद इनको बदला नहीं जा रहा है।
-तालिब खां, पार्षद जलालनगर
दो से तीन साल पुरानी लाइट लगी हैं। इनकी रोशनी तीन गुना कम हो गई है। कोहरे के सीजन में तो कुछ दिखाई नहीं देता है। नगर निगम में कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
- कृष्ण गोपाल बिन्नू, पार्षद रामनगर
गली में लगी लाइट रात के अंधेरे में बहुत हल्की जलती हैं। इसकी वजह से महिलाओं को दिक्कत होती है। कई बाद क्षेत्र के पार्षद से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
- ममता, मोहल्ला चौकसी
मोहल्ले में स्ट्रीट लाइट काफी दिनों से खराब है। कई बार शिकायत की, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ है। अंधेरे में महिलाओं को किसी जरूरी काम से बाहर निकलना पड़ता है तो सुरक्षा का खतरा रहता है।
- रूबी, मोहल्ला मक्कू बाजरिया
16 हजार लाइटों में ई-स्मार्ट कंपनी को नगर निगम क्षेत्र में 4500 स्ट्रीट लाइटों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बाकी अन्य लाइटों की जिम्मेदारी नगर निगम के कर्मचारियों पर है। रोजाना 20 से 25 शिकायत आती हैं। इनका समाधान कराया जाता है। अगर कहीं स्ट्रीट लाइट खराब होने की समस्या सामने आएगी तो उसे ठीक कराया जाएगा।
- डॉ.बिपिन कुमार मिश्र, नगर आयुक्त
रूबी, मोहल्ला मक्कू बाजरिया।
रूबी, मोहल्ला मक्कू बाजरिया।
रूबी, मोहल्ला मक्कू बाजरिया।
रूबी, मोहल्ला मक्कू बाजरिया।
रूबी, मोहल्ला मक्कू बाजरिया।
रूबी, मोहल्ला मक्कू बाजरिया।