कुर्रिया कलां में कथा सुनते श्रद्धालु। संवाद
कुर्रियाकलां। श्रीमद्भागवत कथा में अंतिम दिन रविवार को कथाव्यास पंडित ओमप्रकाश त्रिवेदी ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति स्वीकार कर लिया, लेकिन उनका भाई रुक्मी बहन का विवाह शिशुपाल से कराना चाहता था। इसका पता चलते ही रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण के पास अपना परिणय संदेश भिजवाया।
संदेश में उन्होंने कहा कि वह विवाह उन्हीं से करेंगी, अन्यथा प्राण त्याग देंगी। बाद में भगवान श्रीकृष्ण ने शिशुपाल व उसके मित्रों को युद्ध में हराया और रुक्मिणी को द्वारका ले जाकर उनसे विधिपूर्वक विवाह किया।
कथा के विश्राम पर यजमान संजय मिश्रा ने सपत्नीक भागवत की आरती उतारी। कथा श्रवण में संजय मिश्रा, शोभित मिश्र, रामगोपाल, मदनगोपाल आदि मौजूद रहे। संवाद