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कठिन समय में नहीं डिगे कदम, मुश्किलों को मात देकर पाया मुकाम

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नीरा गुप्ता - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। हर साल आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। इस दिन महिलाओं के हितों और उनके उत्थान को लेकर तमाम बातें होती हैं। इस सबके बीच कुछ ऐसी भी महिलाएं हैं।, जिन्होंने तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद अपना हौसला डिगने नहीं दिया। शहर की रहने वाली नीरा गुप्ता और रचना मोहन ने ऐसे ही मुश्किल हालातों में धैर्य के साथ काम लिया और खुद व परिवार को संकट से उभारा। अब तरक्की की नई दास्तान लिख रही हैं।
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बचपन के शौक ने नीरा को बनाया आत्मनिर्भर
शाहजहांपुर। कटियाटोला निवासी संजय गुप्ता की पत्नी नीरा गुप्ता ने पाककला को आत्मनिर्भर होने का जरिया बना लिया। पति के बीमार होने के बाद आर्थिक तंगी के कारण नीरा ने टिफिन सेवा शुरू की। दो वर्ष पहले उन्होंने एक टिफिन से शुरुआत की थी, लेकिन अब उनके द्वारा सप्लाई किए जा रहे टिफिन की संख्या 100 पहुंच गई। इस काम के जरिये नीरा खुद सशक्त हुईं, साथ ही पांच महिलाओं को भी रोजगार भी दिया।
संजय गुप्ता की दूध-दही के पैकेट की एजेंसी थी। फरवरी 2019 में ब्रेन हेमरेज होने के बाद उनकी सारी जमा पूंजी इलाज में खर्च हो गईं। परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने पर नीरा गुप्ता काफी परेशान रहने लगीं। एक तरफ पति की दवाई का खर्च तो दूसरी ओर परिवार की गाड़ी चलाने की चिंता थी। ऐसे में बचपन से विभिन्न तरह के व्यंजन बनाने में पारंगत नीरा ने अपने इस हुनर को आमदनी का जरिया बनाने की ठान ली। उन्होंने टिफिन सेवा की शुरुआत डूडा ऑफिस से की। पहला टिफिन वहां काम करने वाले दीपक सिंह को भेजा। इसके बाद धीरे-धीरे प्रचार प्रसार खुद ही शुरू किया। उनका टिफिन का बिजनेस चल निकला। स्कूलों, बैंकों, सरकारी दफ्तरों से उनके पास ऑर्डर आने लगे। अब उनकी रसोई से हर रोज 100 टिफिन विभिन्न जगहों पर सप्लाई होते हैं। साथ ही विशेष ऑर्डर भी तैयार करना शुरू कर दिए। अकेले काम शुरू करने वाली नीरा ने अब पांच अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रखा है। नीरा गुप्ता का कहना है कि हालात हमेशा अच्छे और अनुकूल नहीं रहते, मगर धैर्य और हौसले का साथ न छोड़ा जाए तो बुरा वक्त आसानी से कट जाता है। नीरा अब सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। उनका कहना है कि आसपास की महिलाओं को भी सहारा देने का प्रयास रहता है।
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पति के निधन के बाद संभाला परिवार और कारोबार
शाहजहांपुर। सदर बाजार निवासी प्रशांत मोहन के निधन के बाद पत्नी रचना मोहन के लिए परिवार और बिजनेस संभालना काफी मुश्किल हो गया था। ऐसे समय में रचना मोहन ने हिम्म्त से काम लिया। तमाम दुश्वारियों को पार करते हुए कारोबार को तरक्की की राह पर दौड़ाया। वर्तमान में बेटा पुरु मोहन बिजनेस में साथ दे रहा है। जबकि बेटी एक कंपनी में जॉब कर रही है।
प्रशांत मोहन का बहादुरगंज में सर्जिकल स्टोर था। उनका कारोबार बड़े पैमाने पर फैला था। सब कुछ ठीक चल रहा था। अचानक प्रशांत मोहन का हृदयगति रुक जाने से निधन हो गया। उस समय बेटी प्रथा मोहन इंटरमीडिएट में थी। जिंदगी के बीच सफर में पति के छोड़कर जाने पर रचना मोहन अकेली पड़ गईं। उनके सामने परिवार के साथ कारोबार को संभालने की चुनौती थी। रचना ने हिम्मत नहीं हारी। खुद ही पति की सीट को संभाला। धीरे-धीरे काम को आगे बढ़ाया। चूंकि, बहादुरगंज में पहले जैसा कारोबार का माहौल नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में दुकान का सामान घर में शिफ्ट कर लिया। कुछ दिन तक वहां से कारोबार किया। इस बीच रंगमहला में दवाई, केमिकल, सर्जिकल का काम शुरू किया। बेटी का दिल्ली के एक कॉलेज में दाखिला करा दिया। समय बीतने के साथ ही संकट के बादल छट गए। वर्तमान में रचना बेटे के साथ मिलकर बिजनेस संभाल रही हैं। उनकी बेटी एनआईटी में एग्जीक्यूटिव कंटेट डेवलपर है। रचना का मानना है कि बुरे वक्त में सबसे ज्यादा सहारा उनके धैर्य ने दिया। परिवार को संभालने के साथ ही आर्थिक हालात बेहतर करने का दबाव था। ऐसे समय में धीरे-धीरे कर परिवार और व्यापार को संभाला और संवारा।

रचना मोहन- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

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