जलालाबाद। मानसूनी बारिश शुरू होने के साथ ही गंगा, रामगंगा और बहगुल नदियों के तटीय गांवों के लोगों को बाढ़ का खतरा सताने लगा है, लेकिन प्रशासन उदासीन है। इसका प्रमाण क्षेत्र की वे सड़कें हैं, जो गत वर्ष बाढ़ से बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के बावजूद अब तक दुरुस्त नहीं की गईं हैं।
तिकोला गांव में बहगुल नदी पर नया पुल बनने के बाद इसके आगे बनाई गई एप्रोच रोड काफी नीची होने के कारण बीते साल कई दिन बाढ़ का पानी उसके ऊपर से होकर गुजरता रहा था। इस कारण पुल के पास सड़क का करीब बीस मीटर से ज्यादा हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर आवागमन के लिए खतरनाक हो गया, जिसकी मरम्मत अब तक नहीं कराई गई है।
याकूबपुर तिराहे से नूरपुर करही जाने वाले मार्ग का भी यही हाल है। यह मार्ग पिटारमऊ गांव के आगे मंझारा तक करीब 70 से 80 मीटर तक पूरी तरह उखड़कर कच्चे रास्ते में तब्दील हो गया, लेकिन वहां डामर बिछाने की जरूरत नहीं समझी गई। मार्ग के किनारे बसे गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ आने पर उनका गांव से बाहर निकलना भी कठिन हो जाएगा और राहत पहुंचाने में प्रशासन को भी दिक्कत होगी।
ग्रामीण बोले- अधिकारियों ने दिया था बारिश के बाद सड़क की मरम्मत का आश्वासन-
अधिकारियों ने गत वर्ष बरसात गुजरने के बाद रोड की मरम्मत करा देने का आश्वासन दिया था, लेकिन कोई काम अब तक नहीं कराया गया है।
-आदेश, कटरिया
बाढ़ के दौरान सड़क कई दिनों तक पानी में डूबी रहने के कारण पूरी तरह टूट गई। बाढ़ खत्म होने के बाद भी सड़क सही नहीं कराई गई।
-बद्री कुशवाहा, अतरी
बीती बरसात में कोठी वाला बाग गांव से नूरपुर करही तक सड़क में जगह-जगह गहरे गड्ढे हो गए, लेकिन मार्ग अब तक सही नहीं कराया गया।
-रामराज, नूरपुर करही
जलालाबाद के गांव तिकोला से संगाहा जाने वाली पूरी तरह क्षतिग्रस्त सड़क। संवाद
जलालाबाद के गांव तिकोला से संगाहा जाने वाली पूरी तरह क्षतिग्रस्त सड़क। संवाद
जलालाबाद के गांव तिकोला से संगाहा जाने वाली पूरी तरह क्षतिग्रस्त सड़क। संवाद