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Shahjahanpur News: बाढ़ से बचाव के इंतजाम अधूरे, विस्थापन की तैयारियां पूरी

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अजीजगंज में गर्रा नदी किनारे बनाया जा रहा तटबंध। संवाद
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शाहजहांपुर। पिछले वर्ष आई बाढ़ से मिले जख्म अब तक भर नहीं पाए हैं। इस वर्ष भी अधिक बारिश की आशंका जताई जा रही है। बाढ़ से बचाव की तैयारी अभी अधूरी है। प्रशासन का दावा है कि बाढ़ आने पर विस्थापन की स्थिति के मद्देनजर इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं।
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पिछले वर्ष जुलाई में गर्रा और खन्नौत नदी में आई बाढ़ में शहर के आधे मोहल्ले जलमग्न हो गए थे। लोगों के घरों में पानी भर गया था। मजबूरी में लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों में सामान छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंंचे थे। प्रशासन की मदद से भी लोगों को बाढ़ग्रस्त इलाकों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था।
शहर में बाढ़ से राहत के बचाव कार्य के नाम पर गर्रा नदी अजीजगंज में दायें किनारे पर डेढ़ किमी लंबा तटबंध बनाया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि इसके बनने से 95 हेक्टेयर क्षेत्र में बाढ़ से बचाव होगा। अजीजगंज में गर्रा नदी के पुल को ऊंचा कराने की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हो पाई है। बारिश का मौसम शुरू हो गया है। ऐसे में इस सीजन में इसके ऊंचा होने की संभावना कम ही है।
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लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर पिछले वर्ष पुलिया बंद होने की वजह से बाढ़ का पानी हाईवे पर आ गया था। प्रशासन ने दावा किया था कि हाईवे के नीचे बनी पुलियां को साफ कराया जाएगा। नए स्थानों पर पानी की निकासी के इंतजाम किए जाएंगे, लेकिन ऐसा अभी हुआ नहीं है। प्रशासन के मुताबिक, मिर्जापुर में ढाई घाट पर भैसार तटबंध बनाया गया है। हालांकि यह कई वर्ष पहलेे बनाया गया था। इसमें कुछ नया कार्य नहीं हुआ है।


जिले में सुरक्षित स्थानों पर बनेंगे 27 राहत शिविर

बाढ़ की आशंका को देखते हुए जिले में 27 राहत शिविर चिह्नित किए जा रहे हैं। इसमें अधिकतर शिविर सुरक्षित स्थानों- प्राथमिक, माध्यमिक स्कूल या डिग्री काॅलेज में लगाए जाएंगे। इसमें सदर तहसील में सात, तिलहर में छह, पुवायां में पांच, जलालाबाद में पांच, कलान में तीन राहत शिविर चिह्नित किए गए हैं। इन राहत शिविरों में 5570 लोग रह सकेंगे। इसमें 305 गांव संबद्ध होंगे।



प्रशासन की ओर से विस्थापन के लिए की गईं तैयारियां
- जिले में 64 बाढ़ चौकियां चिह्नित की गईं हैं।
- 27 राहत आश्रय स्थल चिह्नित किए गए हैं।
- 28 मझोली नावों के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है।
- बचाव कार्य के लिए जिले में 31 गोताखोर लगाए जाएंगे। सदर में पांच, जलालाबाद में 10 और कलान में चार गोताखोर लगाए जाएंगे।
- सात मेडिकल टीमें गठित की गईं हैं। इसमें 30 चिकित्सक, 60 पर्यवेक्षक और 131 कर्मचारी शामिल रहेंगे।
- जिले में 11 पशु शिविर बनाए जाएंगे। बाढ़ के दौरान पशुओं के लिए भूसा और चारा का टेंडर किया गया है।
- बाढ़ राहत किट की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसमें 26 खाद्य सामग्री और राहत बचाव की वस्तुएं भी शामिल रहेंगी।
- बाढ़ के दौरान लंच पैकेट वितरित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है।
- सूचना के आदान-प्रदान के लिए कलक्ट्रेट कार्यालय में कंट्रोल रूम खोला जाएगा।




पिछले वर्ष की स्थिति
- पिछले वर्ष बाढ़ से सदर, कलान और जलालाबाद सर्वाधिक प्रभावित हुए थे।
- सदर में बाढ़ से प्रभावित गांव व मोहल्ले 54, तिलहर में 19, जलालाबाद में 41 और कलान में चार शामिल थे।
- पिछले वर्ष जिले में बाढ़ से 94,450 जनसंख्या प्रभावित हुई थी।
- कुल 2370.02 हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ था।
- 10,705 कृषकों में 4.17 करोड़ फसल क्षति राशि वितरित की गई थी।
- 270 मकान क्षतिग्रस्त हुए थे, इनके लिए 16.48 करोड़ का मुआवजा वितरित किया गया था।



मोहनपुर में कटान रोकने के कोई इंतजाम नहीं
परौर। मजरा मोहनपुर में रामगंगा नदी में तेजी से कटान हो रहा है। नारायण नगर रामगंगा के कटान से प्रभावित मजरा हैं। कटान में हजारों बीघा जमीन नदी में कटकर बर्बाद हो गई। इसके बाद शारदा नहर खंड द्वारा नारायण नगर में परक्यूपाइन स्टैंड कटान रोकने के लिए लगाए जा रहे हैं, लेकिन मजरा मोहनपुर में कटान रोकने के लिए अभी कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। संवाद



बाढ़ से बचाव के लिए प्रशासन की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन ने तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। बाढ़ में किसी तरह का नुकसान नहीं हो, इसका पूरा प्रयास किया जा रहा है। - अरविंद कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व

अजीजगंज में गर्रा नदी किनारे बनाया जा रहा तटबंध। संवाद

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