पुवायां क्षेत्र के किसान साठा धान को लेकर असमंजस में हैं। इसका कारण है कि प्रशासन धान पर रोक के बारे में अपना नजरिया स्पष्ट नहीं कर रहा है। एक तरफ तो साठा धान की नर्सरी डालने वाले किसानों को नोटिस भेजे जा रहे हैं, दूसरी ओर एसडीएम साठा धान की रोपाई पर किसी तरह के प्रतिबंध के आदेश से इंकार कर रहे हैं। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने तीन जनवरी को मुख्य विकास अधिकारी के पत्र का हवाला देते हुए जिले की सभी कृषि रक्षा इकाइयों के प्रभारियों से साठा धान की नर्सरी डालने वाले किसानों की सूची तलब की थी। इसके बाद एसडीएम रामशंकर ने किसानों को सीआरपीसी की धारा 133 (1) के तहत साठा को जल स्तर प्रभावित करने वाला बताते हुए पौध नष्ट करने के नोटिस जारी किए थे, लेकिन किसी किसान ने पौध नष्ट नहीं की। बहुत से किसान अभी भी बड़े क्षेत्रफल में साठा धान की पौध डाल रहे हैं, वहीं कुछ किसान प्रशासन का स्पष्ट आदेश नहीं होने के कारण साठा को लेकर असमंजस में हैं।
डीएम की रोक के बाद भी की गई थी साठा की फसल
पुवायां। पिछले साल डीएम विजय किरन आनंद ने साठा धान लगाने पर पाबंदी लगा दी थी। 30 अप्रैल को जारी आदेश में डीएम ने 30 जून तक अथवा आदेश वापस नहीं होने तक धान लगाने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बाद भी बड़े भू-भाग पर साठा धान लगाया गया था।
किसानों को धारा 133 के तहत नोटिस भेजे गए हैं। कार्रवाई जिला कृषि रक्षा अधिकारी के स्तर से होगी। साठा धान पर प्रतिबंध लगाने का कोई आदेश उन्हें नहीं मिला है। आदेश मिला तो कार्रवाई की जाएगी।- रामशंकर एसडीएम पुवायां