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सूरज का पारा चढ़ा, हवा की नमी सूखी

Tue, 03 May 2016 11:23 PM IST
ब्यूरो /शाहजहांपुर
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पिछले सालों में बारिश में कमी इस बार भीषण गर्मी का सबब बन रही है। पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष न्यूनतम और अधिकतम तापमान में अच्छी खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यही नहीं कुछ बारिश कम होने का असर और कुछ तापमान में वृद्धि, हवा में नमी की मात्रा में बेतहाशा कमी आई है। ऐसे में सूरज का पारा इस बार ज्यादा जला रहा है। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद की मौसम वेधशाला में दर्ज मौसम के आंकड़ों के आधार पर मौसम विज्ञानियों ने इस तथ्य का खुलासा किया है। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष शाहजहांपुर में अप्रैल में दिन के अधिकतम तापमान में औसत 4.8 यानी करीब डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई है। गत वर्ष अप्रैल माह में अधिकतम तापमान का औसत 34.1 डिग्री सेल्सियस था जो इस वर्ष 38.9 डिग्री सेल्सियस हो गया। अप्रैल में दिन के तामपान का औसत गत पांच साल में अब से पहले वर्ष 2013 में सबसे ज्यादा 36.8 डिग्री सेल्सियस रहा था। यही नहीं रात के तापमान में भी करीब ढाई डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई है। रात का तापमान (न्यूनतम तापमान) का औसत पिछले पांच वर्ष की तुलना में इस वर्ष सबसे ज्यादा 22. 5 डिग्री सेल्सियस रहा। इससे पहले वर्ष 2013 में अप्रैल में रात के तापमान का सबसे अधिक औसत 20.2 डिग्री सेल्सियस था। अन्य वर्षों में यह 20 डिग्री सेल्सियस से कम ही रहा। मौसम के मिजाज में तल्खी का एक कारण हवा में नमी (आर्द्रता) की कमी भी बनी। गत वर्ष अप्रैल माह में आर्द्रता का औसत 59 फीसदी था जबकि जो इस वर्ष महज 24 फीसदी ही रहा। आर्द्रता में इतनी कमी पहले कभी नहीं रही। वर्ष 2012 और 2013 में अप्रैल माह में आर्द्रता का औसत सबसे कम 44 फीसदी था। मौसम वेधशाला परिषद जिस फिजियोलाजी विभाग में है, उसके अध्यक्ष डॉ. एसपी सिंह कहते हैं तापमान में बढ़ोतरी के साथ आर्द्रता के न्यूनतम होने के चलते सूखी गरमी का माहौल बना है। इसीलिए मई में चलने वाले लू के थपेड़े इस बार अप्रैल में ही महसूस किए गए। 
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गरमी में पांच साल के अधिकतम तापमान (डिग्री सेल्सियस में) का ब्योरा एकनजर में
वर्ष            अप्रैल/तापमान                मई/तापमान
2012        24 अप्रैल/38.6            29 मई/42.8 
2013        30 अप्रैल/40                26 मई/43 
2014        30 अप्रैल/40.6            23 मई/42.6
2015        24 अप्रैल/38.4            24 मई/43.7
2016        28 अप्रैल/41.2            02 मई/42.8

तापमान में बढ़ोत्तरी के साथ ही हवा में नमी की कमी से आम जनजीवन के साथ ही फसलों पर भी असर पड़ा है। फसलों को अधिक सिंचाई की जरूरत है। अन्य वर्षों में गरमी में गन्ने की सिंचाई पांच बार करनी होती थी जबकि इस बार आठ बार सींचने की जरूरत है। सिंचाई का अंतराल भी 20 दिन के बजाए 15 दिन का रखें। - डॉ. शिवपाल सिंह, विभागाध्यक्ष फिजियोलाजी, उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर
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