शाहजहांपुर। ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर वट सावित्री व्रत रखकर सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु के लिए कामना की। सुहागिन महिलाएं शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित वट वृक्ष के नीचे एकत्रित हुईं। इसके बाद विधिवत पूजा की।
महिलाओं ने सबसे पहले वट वृक्ष को हल्दी का लेप लगाया गया। फिर पीले धागे को लपेटते हुए सात बार परिक्रमा की। इसके बाद जल अर्पण किया। पूजन के बाद महिलाओं ने व्रत को खोला। वट वृक्ष की पूजा करने के लिए सुहागिन महिलाएं शहर के इंदिरानगर स्थित ऋषि आश्रम और कटिया टोला में साईं बाबा मंदिर के सामने वट वृक्ष के नीचे एकत्र हुईं।
इसी तरह से पोस्ती पाकड़ में बाबा वनखड़ी नाथ मंदिर, हुंडाल खेल में प्राचीन मंदिर, बहादुरगंज में वट वृक्ष के नीचे भी महिलाओं का जमावड़ा लगा और पूजा अर्चना संपन्न की गई। वट सावित्री पूजन के संबंध में महिलाओं ने बताया कि आज ही के दिन सावित्री ने बरगद पेड़ के नीचे अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज को प्रसन्न कर वापस प्राप्त किए थे। इसी मान्यता के मुताबिक अपने सुहाग की रक्षा व पति की लंबी उम्र की कामना को लेकर सुहागिन वट सावित्री का पूजन और व्रत करती हैं।
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प्राचीन वटवृक्ष की पूजा करने आती हैं दस गांवों की महिलाएं
बरतारा। ब्लाक भावलखेड़ा के ग्राम सिमरई में स्थित लगभग 50 वर्ष पुराने वटवृक्ष के नीचे दस गांवों की महिलाएं पूजन करती हैं। वट पूजा में इतनी महिलाओं के आने के बावजूद अभी तक न तो कोई आने-जाने का रास्ता बनाया गया है और न ही यहां पर साफ-सफाई कराई जाती है। स्थान को पक्का भी नहीं कराया गया है।
सौभाग्य को देनेवाला है वट सावित्री व्रत
वट सावित्री पर्व परंपरा, परिवार और प्रकृति प्रेम का पाठ पढ़ाता है। पुराणों में इसे सौभाग्य को देनेवाला और संतान की प्राप्ति में सहायता प्रदान करने वाला माना गया है। - नीलेश मिश्रा, शिवपुरम कॉलोनी
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पहली बार वट सावित्री का व्रत रखा
पहली बार वट सावित्री का व्रत रखा है। उनकी जल्दी ही शादी हुई थी। सास ने बताया कि पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखा जाता है। पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत रखा है। - प्राची, शिवपुरम कॉलोनी
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पति की दीघार्यु के लिए रखते हैं व्रत
इस व्रत का उद्देश्य सौभाग्य की वृद्धि और पतिव्रत के संस्कारों को आत्मसात करना है। पति की दीघार्यु के लिए ही महिलाएं वट सावित्री का व्रत रखकर पूजन अर्चन करती हैं। - स्नेहलता, मोहल्ला लोदीपुर
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक रखते हैं व्रत
हम अपनी धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक व्रत रखते और पर्व मनाते है। वट सावित्री व्रत भी उन्हीं मान्यताओं का हिस्सा है। मैंने भी वट का पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की है। - डॉ. संगीता मोहन, चारखंभा
ऋषि आश्रम में वट वृक्ष का पूजन करतीं सुहागिनें। संवाद
ऋषि आश्रम में वट वृक्ष का पूजन करतीं सुहागिनें। संवाद
ऋषि आश्रम में वट वृक्ष का पूजन करतीं सुहागिनें। संवाद
ऋषि आश्रम में वट वृक्ष का पूजन करतीं सुहागिनें। संवाद
ऋषि आश्रम में वट वृक्ष का पूजन करतीं सुहागिनें। संवाद
ऋषि आश्रम में वट वृक्ष का पूजन करतीं सुहागिनें। संवाद
ऋषि आश्रम में वट वृक्ष का पूजन करतीं सुहागिनें। संवाद
ऋषि आश्रम में वट वृक्ष का पूजन करतीं सुहागिनें। संवाद