गरीब, दलित और मजदूर बहुल गांव में आग की लपटों ने न केवल सौ से अधिक घर जलाए बल्कि कई रंग भरे सपनों को भी राख कर दिया। बेहद गरीबी में जीने वाले अधिकतर परिवारों में बच्चे होली की उमंगों से भरे हुए थे और जतन के साथ पैसे इकट्ठा कर खरीदे गए कपड़ों, रंग, गुलाल, पिचकारी देखकर खुश हो रहे थे। लेकिन आग ने इन उमंगों को जला डाला। यही नहीं, इस गांव में आधा दर्जन से अधिक परिवारों में अप्रैल में बेटे-बेटियों की शादी है। बेटियों का दहेज और दुल्हनों की बरी भी आग की भेंट चढ़ गई। मैलानी मार्ग स्थित गांव हरीरपुर के पास से लुकटहा को रास्ता गया है। आधे गांव में महाउत और आधे गांव में पूर्वांचल से आए दलित जाति के लोग रहते हैं। गांव के पुरुष दिन में मजदूरी आदि के लिए निकल जाते हैं और महिलाएं पशुओं के लिए चारा आदि लेने खेतों में चली जाती हैं। यही उनके जीवन यापन का सहारा है। गांव के लोग बेहद गरीब हैं लेकिन होली के लिए यथासंभव तैयारी की थी। इसके अलावा गांव के संतोष की पुत्री चांदना की शादी 10 अप्रैल, कल्लू की पुत्री रोशनी की शादी 17 अप्रैल, श्रीराम की पुत्री छाया की शादी 10 अप्रैल, गुड्डू के पुत्र डालचंद्र की शादी 18 अप्रैल, जयपाल की पुत्री ममता की शादी 29 अप्रैल, क्षत्रपाल की पुत्री काजल की शादी 27 अप्रैल, काशीराम की पुत्री राजरानी की शादी 29 अप्रैल को होनी है। शादी के लिए परिवार के लोगों दहेज आदि का इंतजाम कर लिया था। केवल बेटियों के परिवार ही नहीं बल्कि हर घर की चिंता थी कि इन बेटियों की शादी कैसे होगी। आग से जले घर में तिनका तक नहीं बचा। लोगों को रात गुजारने के लिए स्कूल में शरण लेनी पड़ी। घटना के बाद एसडीएम पुवायां सलिल कुमार पटेल और सीओ पुवायां उमेश शर्मा मौके पर पहुंचे। उन्होंने हालात का जायजा लेकर रिपोर्ट ऊपर भेजी और राहत कार्य शुरू कराया। एएसपी रमेश कुमार भारतीय ने भी गांव पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया और मदद का आश्वासन दिया।
लकड़ी, कंडा और अंधड़ से बढ़ी आग
खुटार। लुकटहा जंगल के किनारे बसा है। गांव के तमाम लोग जंगल से लकड़ी बीनकर जीविका चलाते हैं। कई घरों में लकड़ी के ढेर लगे हुए थे। यहां पशुपालन भी बड़े पैमाने होता हैं। ऐसे में तमाम घरों के आसपास कंडों की बठिया भी थीं। अंधड़ से आग फैली तो सूखी लकड़ी और कंडों ने पेट्रोल जैसा काम किया। आग इस कदर विकराल हुई कि गांव में घुसने की हिम्मत किसी की भी नहीं हो सकी। लोगों ने किसी तरह रस्सी काटकर मवेशियों भगाया और खुद भी भागे। लेकिन हर तरफ आग के चलते मवेशी जिधर भागे उधर मौत ही मिली। आग ने उन्हें जिंदा ही भून डाला। आग लगने के काफी देर बाद तक गांव के दो बच्चों का भी पता नहीं चला। इससे कोहराम मचा रहा लेकिन बाद में दोनों बच्चे दूर खेतों में सकुशल मिल गए।
कुछ भी नहीं बचा
आग से गांव के श्रीपाल, कल्लू, भाईलाल, जगदीश, रामऔतार, बनवारी लाल, लक्ष्मी नारायण, लालाराम, पातीराम, वेदप्रकाश, नरेश, दिलीराम, लल्लाराम, गुड्डू, जीवनलाल, जिब्भी, धर्मेंद्र, सोनपाल, सोबरन, पूरनलाल, सुरेंद्र, जयपाल, तोताराम, राकेश, दीवान, राजेंद्र, तिकुन्नी, हरीश, ईश्वरदयाल, क्षत्रपाल, काशीराम, राजू, चिजय, संजीव, मोहनलाल, सत्यपाल, सोनू, कमलेश, हप्पू, बालकिशन, रंजीत, शिशुपाल, सीताराम का सब कुछ जलकर राख हो गया। अन्य लोगों का भी अधिकांश सामान जल गया है।
आग से कई लोग झुलसे
खुटार। आग बुझाते समय पूरनलाल, सुरेंद्र, जयपाल, तोताराम, राकेश, दीवान, राजेंद्र, तिकुन्नी, हरीश, ईश्वरदयाल, क्षत्रपाल, काशीराम, राजू, चिजय, संजीव, मोहनलाल, सत्यपाल, सोनू, कमलेश, हप्पू, बालकिशन, रंजीत सहित कई लोग झुलस गए हैं। उनकी हालत अब ठीक है। जबकि किशनपाल की तीन वर्षीय पुत्री राजरानी और रमेश का चार वर्षीय पुत्र अनिल ज्यादा झुलस गए हैं। खुटार के सरकारी अस्पताल से डॉ. फहीम के नेतृत्व में एक टीम गांव पहुंचकर लोगों का इलाज कर रही है।
अग्निकांड में करीब डेढ़ सौ परिवार बेघर हो गए हैं। 900 या उससे कुछ अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। शुक्र है कि कोई हताहत नहीं हुआ है। बेघर हुए लोगों को गुरुद्वारे के आसपास ठहराकर उनके खाने-पीने की व्यवस्था कराई गई है। सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।
- डॉ. मनोज कुमार, एसपी शाहजहांपुर
आग पर काबू पाया जा चुका है। 115 परिवारों के करीब एक हजार लोग प्रभावित हुए हैं। इनके घर जल गए हैं। बेघर हुए लोगों को गुरुद्वारा और प्राथमिक स्कूल में ठहराने और भोजन की व्यवस्था कराई गई है। कंबल भी मुहैया करा दिए गए हैं। सोमवार सुबह से टेंट लगवाए जाएंगे। नुकसान का आकलन किया जा रहा है। 48 घंटे में राहत राशि दे दी जाएगी।
- सलिल कुमार पटेल, एसडीएम पुवायां
मदद को बढ़े हाथ
खुटार। आग से सब कुछ गंवा बैठे लोगों की मदद के लिए तमाम लोग आगे आए हैं। खुटार एसओ जसवीर सिंह ने अग्निकांड के पीड़ितों के लिए सोमवार शाम भोजन का इंतजाम किया है। विधायक शकुंतला देवी भी गांव पहुंची और लोगों से बात कर मदद का भरोसा दिया। उधर, गांव हीरपुर के गुरुद्वारा से गांव के लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है।