कुर्रियाकलां के शनि मंदिर पर रासलीला का मंचन करते कलाकार।संवाद
कुर्रियाकलां। ग्राम कुर्रियाकलां में चल रही रासलीला में वृंदावन से आए कलाकारों ने भक्त प्रह्लाद की लीला का मंचन किया।
इसमें दर्शाया गया कि प्रह्लाद का जन्म असुरों के राजा हिरण्यकशिपु के घर हुआ था, लेकिन वह भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे। हिरण्यकशिपु ने अपनी शक्ति के बल पर सभी से विष्णु की पूजा बंद करने का आदेश दिया। प्रह्लाद ने अपने पिता के आदेश के बाद भी भगवान विष्णु की भक्ति जारी रखी। इससे क्रोधित होकर हिरण्यकशिपु ने उसे कई बार मारने की कोशिश की।
हिरण्यकशिपु ने अपनी बहन होलिका से भी मदद ली। होलिका को आग से न जलने का वरदान प्राप्त था। हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठने के लिए कहा लेकिन वह बच गए और होलिका स्वयं जलकर भस्म हो गई। संवाद