जलालाबाद में जिला पंचायत की टीम से नोकझोंक करते कब्जेदार। संवाद
जलालाबाद। फर्रुखाबाद हाईवे पर सब्जी मंडी के पीछे स्थित पुराने सरकारी अस्पताल में कब्जे हटवाने के लिए प्रशासनिक और पुलिस की टीम के साथ पहुंचे जिला पंचायत कर्मचारियों को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। इस दौरान करीब एक घंटे तक नोकझोंक होती रही और लोगों ने हंगामा भी किया। कब्जेदारों ने जिला पंचायत अध्यक्ष सहित कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए। इस दौरान पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में ले लिया। बाद में टीम बिना कार्रवाई किए लौट गई।
करीब दो दशक पहले नगरिया में नया सीएचसी बन जाने के बाद सब्जी मंडी के पीछे बना पुराना पीएचसी भवन खाली है। अस्पताल में बने आवासों व उसकी खाली जमीन पर कई लोगों ने कब्जे कर लिए। कब्जेदारों का कहना है कि उन लोगों के पास जिला पंचायत की ओर से दिया गया अलॉटमेंट पत्र है।
खास बात यह है कि अस्पताल की जमीन जिला पंचायत अपनी तथा स्वास्थ्य विभाग अपनी बता रहा है। इन कब्जों को हटवाने के लिए प्रशासन ने पहले भी कई बार प्रयास किए लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका। जिला पंचायत के जेई ब्रजेश चौधरी ने बताया कि कब्जों को लेकर हाल ही में डीएम की ओर से एसडीएम जलालाबाद के नेतृत्व में गठित की गई अधिकारियों की टीम ने जांच-पड़ताल के बाद पांच कब्जेदारों को नोटिस जारी किए थे।
शनिवार को नायब तहसीलदार रोहित कटियार के नेतृत्व में जिला पंचायत के कर्मचारियों की टीम पुलिस बल के साथ कब्जा हटवाने के लिए जेसीबी लेकर मौके पर पहुंची। इस दौरान कब्जेदारों व जिला पंचायत कर्मचारियों के बीच कहासुनी हो गई। कब्जेदारों ने उन पर मोटी रकम लेकर अलाॅटमेंट करने सहित जिला पंचायत अध्यक्ष पर विभिन्न तरह के गंभीर आरोप लगाए।
कब्जा करने का एक आरोपी जेसीबी के आगे लेट गया जबकि एक व्यक्ति ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक आवास में लगाए गए ताले को ईंट मारकर तोड़ दिया। पुलिस ने उसे पकड़कर थाने पहुंचा दिया। करीब एक घंटे तक जमकर हंगामा चलता रहा। बाद में नायब तहसीलदार सहित पुलिस व जिला पंचायत कर्मचारी बिना किसी कार्रवाई के लौट गए।
जिला पंचायत की जमीन पर पुराना अस्पताल बना हुआ था। यह शफाखाना के नाम से दर्ज है। बाढ़ के दौरान कई वर्ष पहले लोगों को इसमें शरण दी गई थी। प्रशासन की जांच में भी पाया गया कि लोग इसमें अवैध रूप से रह रहे हैं। हमारे ऊपर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं।
- ममता यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष