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फर्जी टीईटी प्रमाणपत्र से बने शिक्षक, तीन बर्खास्त

Wed, 27 Apr 2016 12:34 AM IST
ब्यूरो /शाहजहांपुर
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टीईटी 2011 के प्रशिक्षुओं बड़े पैमाने में प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल में हुई नियुक्तियों में फर्जीवाड़ा किए जाने के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। प्रमाणपत्र के सत्यापन में पिछले सप्ताह ही एक शिक्षक के प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने पर उसकी सेवा समाप्त कर दी गई थी। अब फिर तीन शिक्षकों ने टीईटी के फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर नौकरी पाई। इसमें से दो को जूनियर हाई स्कूल में गणित विज्ञान शिक्षक भर्ती के तहत नियुक्त किया गया था जबकि एक को प्राथमिक शिक्षक भर्ती में। बीएसए ने तीनों की नियुक्तियां रद कर दी हैं। माना जा रहा है सत्यापन में अभी और भी फर्जी प्रमाणपत्र पकड़ जा सकते हैं। शिक्षक पात्रता परीक्षा 2011 के करीब एक लाख प्रशिुक्षओं की भर्ती प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल शिक्षक के रूप में हुई है। बड़े पैमाने पर भर्ती के कारण प्रमाणपत्र में फर्जीवाड़ा किए जाने की आशंका थी। बीएसए राकेश कुमार ने बताया कि इसी आशंका को देखते हुए शासन ने निर्देश दिए थे कि जब तक प्रशिक्षु शिक्षकों के प्रमाणपत्र सत्यापित नहीं हो जाते, उन्हें वेतन नहीं दिए जाएगा। प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए माध्यमिक शिक्षा बोर्ड भेजे गए थे। वहां से आई रिपोर्ट में तीन प्रशिक्षु शिक्षकों के शिक्षक पात्रता प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। 
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बीएसए ने बताया कि वर्ष 2015 में विज्ञान शिक्षक के रूप में फिरोजाबाद निवासी राम कुमार पाठक की नियुक्ति उच्च प्राथमिक स्कूल हरदुआ, पुवायां और फिरोजाबाद के ही रविकांत दीक्षित की उच्च प्राथमिक स्कूल पोहकरनपुर बंडा में वर्ष 2015 में ही हुई थी। आगरा के रझौला निवासी हरिमोहन सिंह चाहर की नियुक्ति प्राथमिक स्कूल बरकलीगंज खुटार में सहायक अध्यापक पद की गई थी। तीनों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच कराई गई। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने तीनों के टीईटी प्रमाण पत्र फर्जी होने की रिपोर्ट भेजी है। बीएसए राकेश कुमार ने बताया कि तीनों की नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी हैं।

बीटीसी के एक प्रमाणपत्र पर दो शिक्षक कर रहे नौकरी 
शाहजहांपुर। फर्जी टीईटी प्रमाणपत्र पर नौकरी पाने के मामले तो खुल ही रहे हैं, अब बीटीसी के एक प्रमाणपत्र पर दो शिक्षकों के नौकरी करने का मामला सामने आया है। दोनों शिक्षकों के नाम और पिता का नाम समान है, जबकि जन्मतिथि में अंतर है। एक के पास शैक्षिक प्रमाणपत्र की मूल प्रति और दूसरे के पास उसकी द्वितीय प्रतिलिपि है। मामला तब खुला जब दोनों में से एक शिक्षक ने मामले की शिकायत बीएसए से की। हरदोई के शिरोमन नगर निवासी और ददरौल के उच्च प्राथमिक स्कूल पंथी में तैनात जयशंकर पुत्र कृष्णकुमार ने बीएसए को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि मिर्जापुर के प्राथमिक स्कूल में जयशंकर पुत्र कृष्णकुमार नाम के शिक्षक उन्हीं के प्रमाणपत्र पर नौकरी कर रहे हैं। ददरौल के जयशंकर सीतापुर से अंतर्जनपदीय स्थानांतरण कराकर वर्ष 2005 में यहां आए थे जबकि दूसरे जयशंकर पुत्र कृष्णकुमार ने मिर्जापुर प्राथमिक स्कूल में वर्ष 2001 से सेवा शुरू की है। मिर्जापुर वाले जयशंकर देवरिया के नोनापार निवासी हैं। बीएसए ने इस शिकायत की जांच कराई तो चौंकाने वाले खुलासा हुआ। दोनों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों में एक ही वर्ष और एक ही अनुक्रमांक (वर्ष 1992, अनुक्रमांक 1276) का बीटीसी प्रमाणपत्र मिला। बीटीसी उत्तीर्ण का यह प्रमाणपत्र एक ही डायट राजकीय दीक्षा विद्यालय ददरौल से जारी हुआ है। दोनों के अंक पत्रों में अंक भी समान है। बीएसए राकेश कुमार ने बताया कि मामला काफी गंभीर है और जांच जारी हैं। मिर्जापुर में नियुक्त जयशंकर पुत्र कृष्ण कुमार की जन्मतिथि आठ जुलाई 1971 है जबकि ददरौल में नियुक्त जयशंकर पुत्र कृष्ण कुमार की जन्मतिथि 20 मार्च 1969 है। संभावना है कि जन्मतिथि से ही असली और नकली जयशंकर का राज खुल जाएगा। मिर्जापुर वाले जयशंकर के पास बीटीसी का अंकपत्र है लेकिन प्रमाण पत्र नहीं है। जबकि ददरौल के जयशंकर के पास प्रमाणपत्र है। 
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