शाहजहांपुर। गर्मी का मौसम आते ही नेत्र रोगी बढ़ने लगे हैं। धूप, धूल एवं फसल की कटाई करते वक्त पताई आंखों में पड़ने से ड्राई आइज, कंजेक्टिवाइटिस, स्टार्क (कंजिया) आदि से पीड़ित मरीज राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं। चिकित्सक के मुताबिक यदि सावधानी नहीं बरती गई तो आंखों की रोशनी पर असर पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रपाट कनौजिया ने बताया कि आंखों के भीतरी की सफाई के लिए आंसुओं का आना बेहद जरूरी होता है। इससे आंखों की गंदगी बहकर बाहर निकल जाती है। गर्मी के मौसम में तापमान एवं तेज धूप के चलते आंसुओं का आना कम हो जाता है। इसके चलते आंखों के सूखने की बीमारी हो जाती है। सफाई न होने के चलते गंदगी आंखों पर जमा हो जाती है।
संक्रमण की वजह से खुजली होना और नजर पर खासा असर पड़ता है। लापरवाही के चलते आंखों की रोशनी कम होने से धुंधला दिखाई देने लगता है। इसके अलावा गर्मी के मौसम में लू एवं धूल भरी हवा चलने से भी आंखों पर खासा असर पड़ता है। आंखों में धूल जाने के कारण बैक्टीरिया इंफेक्शन से एलर्जी कंजेक्टिवाइटिस हो सकता है। विशेषज्ञ के मुताबिक गर्मी में सबसे ज्यादा स्टार्क (कंजिया) रोग से पीड़ित लोग आते हैं। इसमें फलक पर दाना निकल आता है जो खुजली के साथ-साथ दर्द भी करता है।
काला चश्मा पहनें किसान
फिलहाल गेहूं की कटाई चल रही है। कटाई करते वक्त फसल का अवशेष आंखों पर आकर चिपक जाता है। जो कि धीरे-धीरे घाव पैदा कर देता है। यदि इस पर ध्यान नहीं दिया तो आंखें खराब हो सकती हैं। इसलिए फसलों की कटाई करते समय आंखों को कवर करने वाला काला चश्मा किसानों को अवश्य पहनना चाहिए।
नेत्र रोगों से बचने के लिए यह करें
-घर से बाहर निकलने पर काला चश्मा पहन कर निकले।
-प्रयास करें कि धूप में न निकलना पड़े।
-सफर से वापस आने पर आंखों को ताजे पानी से अवश्य साफ करें।
-आंखों की भीतरी सफाई के लिए सीएमसी ड्रॉप का इस्तेमाल करें।
-फसल काटते समय आंखों को कवर करने वाला काला चश्मा किसान अवश्य पहनें।
आंखें शरीर का महत्वपूर्ण अंग है। ऐसे में इनका विशेष ख्याल रखें। घर से बाहर निकलने पर चश्मा अवश्य लगाएं। आंखों की भीतरी सफाई के लिए आई ड्रॉप का इस्तेमाल करें एवं सफर से वापस आने पर पानी के छप्पे मारकर साफ करें। -डॉ. प्रपाट कनौजिया, नेत्र रोग विशेषज्ञ, राजकीय मेडिकल कॉलेज शाहजहांपुर।