साल 1971 की जंग में साथियों के साथ पाकिस्तान का एक टैंक भारत लाने वाले खुटार के सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर बख्शीश सिंह का हार्ट अटैक से निधन हो गया। सोमवार को सैनिक सम्मान के साथ उनको अंतिम विदाई दी गई।
सन 1971 की जंग में साथियों के साथ पाकिस्तानी सेना का टैंक भारत लाने वाले शाहजहांपुर के खुटार के मोहल्ला बजरिया निवासी सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर बख्शीश सिंह (79) को सोमवार को सैनिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनका दो अगस्त को हार्टअटैक से निधन हो गया था। भारतीय सेना की इसी शौर्य गाथा पर बॉर्डर फिल्म भी बनी है।
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सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर बख्शीश सिंह के पुत्र मंदीप सिंह और जगदीप सिंह ने बताया कि पिता उनको जंग के अक्सर किस्से सुनाते थे। पांच अगस्त 1947 को जन्मे बख्शीश सिंह 21 फरवरी 1966 में सेना में भर्ती हुए थे। उनकी पहली पोस्टिंग जयपुर में हुई थी। इसके बाद उनकी तैनाती राजस्थान के जैसलमेर में लोंगेवाला सेक्टर में हो गई।
आज भी यूनिट में खड़ा है पाकिस्तानी टैंक
दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी फौज ने अचानक हमला कर दिया। अग्रिम पंक्ति पर कमांडर मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी अपनी टुकड़ी के साथ मैदान पर डटे थे। भारतीय वायुसेना ने बमबारी की। पाकिस्तान के टैंकों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया। बख्शीश सिंह के साथी पाकिस्तान के एक टैंक को भारतीय सीमा में ले आए जो आज भी उनकी यूनिट में खड़ा है।
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सोमवार को शाहजहांपुर से आए नायब सूबेदार संजय उरांव के नेतृत्व में नायक सुशांत सिंह, सिपाही मधुसूदन, प्रेमसागर, नितिन, सूर्यकांत ने बख्शीश सिंह को सलामी देने के साथ सैनिक सम्मान के साथ विदाई दी। जवानों ने उनकी पत्नी सुखविंदर कौर को तिरंगा सौंपा।