शाहजहांपुर। यूक्रेन की विनिस्तिया की नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहीं तीन छात्राएं लौट आई हैं। घर आने के बाद उनके मुंह से बस यहीं निकला कि बहुत मुश्किल से दिन कटे। सभी की दुआओं ने बचा लिया। बेटियों की घर वापसी के बाद पूरे परिवार में जश्न का माहौल है। चिंता खत्म होने पर परिजन ने शुक्राने की नमाज अदा की।
मोहल्ला खलीलगर्वी निवासी डॉ. मजीद की बेटी इंतेसाम उर्फ जिया, रंगीन चौपाल के सलीमुद्दीन की बेटी सदफ और मोहम्मद जई के रहबर अली की बेटी एंजिला यूक्रेन में एमबीबीएस करने गईं थीं। वहां के खराब हालात को तीनों ने काफी करीबी से देखा। तमाम दुश्वारियों से जूझते हुए तीनों छात्राएं बृहस्पतिवार सुबह दिल्ली पहुंचने के बाद दोपहर घर आ गईं। इंतेसाम उर्फ जिया ने युद्धग्रस्त क्षेत्र की कहानी सुनाईं तो डॉ. मजीद व उनकी बेगम शाकरा बेगम की पलकें गीली हो गईं।
उसने बताया कि सायरन बजते ही बंकर में भागना पड़ता था। एक हाथ में शैक्षिक अभिलेख और दूसरे में पानी और जीनेभर का खाना होता था। तीन दिन यहीं हालात रहे। सात घंटे बंकर में रहने के बाद एक घंटे हॉस्टल में आराम करने का मौका मिल पाता था। इंतेसाम ने बंकर की तकलीफ बयां की। बताया कि 23 से 25 फरवरी के दिन काफी मुश्किल वाले रहे। 25 फरवरी की रात बंकर में थे। अगले दिन तक 11 घंटे तक भूखे-प्यासे बंकर में गुजारना पड़ा। बंकर में मोबाइल के सिग्नल नहीं मिलते थे। चारों तरफ से बंद होने के कारण घुटन महसूस होती थी। सही से बैठ और लेट नहीं पाते थे।
बॉर्डर बंद होने से नहीं चल रहीं थीं ट्रेनें
26 फरवरी की सुबह यूनिवर्सिटी ने छात्रों को वापस जाने के लिए निर्देश दिए। छात्रों ने वापसी की तैयारी की तो बॉर्डर बंद होने के कारण ट्रेन का संचालन बंद मिला। इसके बाद अपने खर्चे पर छात्रों ने बसों का इंतजाम कर वापसी की।
10 किमी पैदल चल बॉर्डर पहुंचे, 17 घंटे में पार किया
इंतेसाम उर्फ जिया, सदफ और एंजिला का सफर काफी ज्यादा दुश्वारी भरा रहा। यूक्रेन से रोमानिया जाने के दौरान जाम की वजह से पांच घंटे का सफर 16 घंटे में पूरा करना पड़ा। बॉर्डर से दस किमी पहले ही बस ने उतार दिया। चलते हुए थक गए। एक हाथ में खाने का इंतजाम, पीने के लिए पानी, शैक्षिक दस्तावेज लेकर ठंड में काफी चलना पड़ा।
जिया ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि बॉर्डर पर बच्चे कम होंगे, लेकिन वहां हजारों स्टूडेंट थे। यूक्रेन की फोर्स पांच छात्रों को प्रवेश कर दो घंटे के लिए गेट बंद कर देते थे। काफी प्रयास कर 17 घंटे के बाद बॉर्डर को पार किया। जिया ने बताया कि छात्रों की भीड़ को काबू में करने के लिए फोर्स ने कई बार हवाई फायर किए, बच्चों से मारपीट की।
बर्फ के तूफान से बढ़ गई थी ठंड
27 फरवरी को तापमान माइनस दस डिग्री चल रहा था। इंतेसाम ने बताया कि रात 11 बजे बर्फ का तूफान आया तो तापमान माइनस 20 डिग्री पहुंच गया। कई छात्र-छात्राओं की तबीयत खराब हो गई। बहुत मुश्किल से बॉर्डर पार किया। यूक्रेन में जितनी दिक्कत थी। उतनी ही सुविधाएं रोमानिया में मिलीं। खाने-पीने के साथ ठहरने के लिए स्थान मिला। इंतेसाम ने भारत सरकार का आभार जताया। बोलीं कि सरकार ने हमारी सकुशल वापसी कराई।
भारत का झंडा लेकर 35 पैदल चल दिया सानी
शाहजहांपुर। यूक्रेन के खारकीव में फंसा मोहम्मद आसिफ का बेटा मोहम्मद सानी युद्धग्रस्त क्षेत्र से काफी दूर निकल आया। इतना लंबा सफर तय करने में उसके पैरों में छाले पड़ गए, साथ ही पैर सूज भी गए। सानी के समूह के लोग हाथ में भारतीय ध्वज लेकर चल रहे थे। इसके बाद वे सुरक्षित ठिकानों तक पहुंच सके। यूनिवर्सिटी के हॉस्टल से निकलकर बुधवार को मोहम्मद सानी रेलवे स्टेशन पर पहुंच गया था। स्टेशन पर आई पहली ट्रेन में उसे जगह नहीं मिल पाई। दूसरी ट्रेन के दरवाजे नहीं खुले।
शाम चार बजे तक इंतजार करने के बाद सानी अपने समूह के साथ पैदल ही बॉर्डर क्रॉस करने के लिए निकल पड़ा। उसने बृहस्पतिवार को अपने पिता मोहम्मद आसिफ को फोन कर पूरी जानकारी दी। उसने बताया कि कच्चे और पक्के रास्तों से होते हुए आधी रात के बाद बिसोचिन पहुंच गया। जहां एक स्कूल में ठहरा है। उसके ग्रुप के लोग भारत का झंडा लेकर चल रहे थे। इस बीच उसके पैर सूज गए। मो. आसिफ ने बताया कि 24 घंटे से बेटे ने कुछ नहीं खाया। एक बिस्किट का पैकेट साथी के बैग में मिला था। उसके चार-चार बिस्किट खाकर काम चलाया।
बेटे से टूट गया था संपर्क, परिजन की बढ़ गई थी चिंता
रेलवे स्टेशन पर पहुंचने के बाद सानी ने अपने परिजन को फोन नहीं किया। उसका फोन भी लगातार बंद जा रहा था। 24 घंटे के बाद बेटे से संपर्क टूटने से पूरे परिवार की चिंता बढ़ गई थी। बृहस्पतिवार को फोन आने के बाद परिजन ने राहत की सांस ली। आसिफ ने बताया कि 95 किलोमीटर दूर बेलबार्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। वहां से वापसी की संभावना है।
इफरा को लेने दंपती दिल्ली हुए रवाना
मोहल्ला बिजलीपुरा निवासी दिलशाद, उनकी पत्नी पूर्व सभासद नूर फातिमा व रिश्तेदार अदनान बेटी इफरा को लेने दिल्ली रवाना हो गए। इफरा रोमानिया के रास्ते बृहस्पतिवार देर रात दिल्ली पहुंचेगी। बेटी की घर वापसी की सूचना से पूरे परिवार में काफी खुशी का माहौल है। दिलशाद बेटी से पल-पल की जानकारी ले रहे हैं।
यूक्रेन से लौटे छात्रों से मिले अधिकारी
-यूक्रेन से लौटने वाले छात्र-छात्राओं से मिलने के लिए बृहस्पतिवार शाम को प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे। एडीएम प्रशासन रामसेवक द्विवेदी, एसडीएम सदर दशरथ कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट देवेंद्र प्रताप सिंह ने अंशिका यादव, इंतेसाम उर्फ जिया, सदफ और एंजिला से मुलाकात की। उनसे यूक्रेन के घटनाक्रम के बारे में जानकारी ली। अधिकारियों ने उनके हौसले की सराहना भी की। अधिकारियों के मुताबिक, 17 छात्र यूक्रेन में फंसे थे। इसमें तनाव वाले इलाके से अधिकतर बाहर आ गए हैं।
यूक्रेन से हंगरी पहुंचने पर आई जान में जान
पशुपालन विभाग के कर्मचारी जियाउद्दीन अंसारी के बेटे सकलैन जिया अंसारी भी दोपहर में दिल्ली पहुंच गए। भारत आने के बाद सकलैन ने राहत की सांस ली। मां अंजुम आरा व पिता जियाउद्दीन भी बेटे सकलैन को देखकर खुश हो गए। दोनों ने उसे गले लगा लिया। दोपहर 12 बजे हंगरी से उसका हवाई जहाज दिल्ली में एयरपोर्ट पर उतरा। एयरपोर्ट से बाहर आकर सकलैन माता-पिता से लिपट गया। इस बीच यूक्रेन की सारी पीड़ा अपनों के पास पहुंचने के बाद गायब हो गई। जियाउद्दीन ने बेटे को गुलाब का फूल देकर स्वागत किया। सकलैन ने बताया कि हंगरी पहुंचने के बाद काफी सुकून मिला। वहां के इंडियन वाशिन्दों ने काफी मदद की।
ईदगाह समिति ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
शाहजहांपुर। प्रबंध समिति ईदगाह के पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को दिया। इसमें युद्धग्रस्त क्षेत्रों में फंसे विद्यार्थियों व भारतीय नागरिकों को वापस लाने की मांग की गई। शहर पेश इमाम मौलाना हुजूर अहमद मंजरी के नेतृत्व में दिए ज्ञापन में बताया कि यूक्रेन में अचानक युद्ध छिड़ जाने से भारतीय नागरिकों व छात्र-छात्राओं की जान खतरे में हैं। यूक्रेन में रूसी सेना की गोलीबारी में कर्नाटक के छात्र की मौत हो गई।
इस विषम परिस्थितियों में भारतीय नागरिकों व छात्रों की सकुशल वापसी कराई जाए। ईदगाह कमेटी के अध्यक्ष राहत अली खां, सचिव सैयद कासिम रजा, जामा मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष डॉ. तारिक अली खां, गुरुद्वारा कमेटी के कर्मजीत बग्गा, मौलाना अनीस रजा खां, आफाक अली खां, शाहिद अनवर कुरैशी आदि मौजूद रहे।
बेटे एहतेशाम को याद कर रो पड़ी मां शहाना
तिलहर। यूक्रेन के लवीव शहर में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गए मीरानपुर कटरा के मोहल्ला बंगशान निवासी एहतशाम जाहिद यूक्रेन और रूस युद्ध के दौरान काफी जद्दोजहद के बाद सोमवार को रोमानिया पहुंच गए थे। अभी वह कैंप में अन्य छात्रों के साथ मौजूद है। यहां पर उनके परिवार में खासी बेचैनी है। मां शहाना और छोटे भाई-बहन बहुत परेशान हैं। अपने बेटे की याद करके शाहना रो पड़ी। ईट भट्टा स्वामी मोहम्मद जाहिद का बड़ा पुत्र एहतशाम शाहिद वर्ष 2019 में एमबीबीएस की पढ़ाई करने यूक्रेन के लवीव शहर गया था।
एहतशाम के मामा रिजवान ने बताया कि मरहूम मोहम्मद जाहिद ने अपने बेटे को डॉक्टर बनने के लिए बड़ी ख्वाहिश के साथ यूक्रेन भेजा था, लेकिन इधर कोरोना की चपेट में आने से मोहम्मद जाहिद का 29 अप्रैल 2021 को इंतकाल हो गया। उस समय बीमारी में एहतशाम यहीं पर था। पिता की तमन्ना पूरा करने के लिए वह डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के लिए फिर यूक्रेन चला गया। बताया कि उसका एक छोटा भाई अफ्फा जाहिद और सबसे छोटी बहन हिरा पढ़ाई कर रही हैं।
रिजवान ने बताया कि एहतशाम रविवार को दो बजे लवीव से अपने 12 दोस्तों के साथ बस से रोमानिया के लिए चला था। बस का इंतजाम उसने और दोस्तों ने मिलकर खुद किया। सोमवार सुबह रोमानिया बॉर्डर से पहले उन्हें बस ने छोड़ दिया। वह कई किलोमीटर पैदल चलकर रोमानिया सीमा पर पहुंचा। यहां पर भारत के सहयोग से उसे और उसके दोस्तों को कैंप में ठहरा दिया है। तहसीलदार तृप्ति गुप्ता ने बताया कि छात्र एहतशाम के शीघ्र ही भारत पहुंचने की उम्मीद है। संवाद
यूक्रेन के सैनिकों ने भारतीय छात्रों से किया दुर्व्यवहार
छात्र एहतशाम जाहिद ने लवीव से अपनी एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा है कि 25 फरवरी को वह अपने दोस्तों के साथ किसी तरह पोलैंड के बॉर्डर पर पहुंचा। उसे पता चला था कि पोलैंड से भारतीय दूतावास के माध्यम से वह भारत पहुंच जाएगा। किसी तरह 40 किलोमीटर का रास्ता पैदल तय करके पोलैंड बॉर्डर पहुंचे। यहां पर यूक्रेन के सैनिकों ने भारतीय छात्रों को बॉर्डर क्रास नहीं करने दिया। जबकि यूक्रेन के लोगों को बॉर्डर से पोलैंड जाने दिया जा रहा था। एहतशाम ने बताया कि उसने और उसके साथियों ने जब बॉर्डर क्रास करने का प्रयास किया। तब यूक्रेन के सैनिकों ने उसके कुछ साथियों की पिटाई कर दी।
आज आएगी अलाइना
तिलहर। डभौरा निवासी सगीर अहमद की बेटी अलाइना अंसारी भी देर रात तक रोमानिया से भारत पहुंच जाएगी। उसके परिजन दिल्ली पहुंच गए हैं। भारत के सहयोग से अलाइना यूक्रेन से निकलकर सोमवार को देर रात रोमानिया पहुंची थी। तब परिजनों की चिंता खत्म हुई थी।
कुंडरिया के सत्यओम भी लौटे
-परौर के कुंडरिया निवासी हरिपाल के बेटे सत्यओम भी रोमानिया से बुधवार रात लौट आए। दिल्ली से उन्हें बुआ का बेटा पुष्पेंद्र अपने साथ नोएडा ले गया। बेटे की वापसी के बाद चाचा दीनदयाल काफी खुश हैं। उनकी सारी चिंता खत्म हो गई है।
रूस में फंसे शोभित और साक्षी, वापसी का इंतजार
जलालाबाद। मोहल्ला आंबेडकर निवासी दवा व्यवसायी राजीव कुशवाहा का बेटा शोभित कुशवाहा रूस के नार्थ मेडिकल एकेडमी से एमबीबीएस कर रहा है। राजीव के भाई संजीव कुशवाहा की बेटी साक्षी कुशवाहा ने पिछले महीने मास्को के औलियानन स्थित एकेडमी में एमबीबीएस में एडमिशन लिया है। परिजन नौ फरवरी को साक्षी को मास्को छोड़कर आए थे। संजीव ने बताया कि रूस छात्र-छात्राओं को देश न छोड़ने को मजबूर किए हुए है।
रूस में मौजूद बच्चों ने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि उन लोगों से कहा है कि यदि वे लोग बिना अनुमति बाहर जाएंगे तो उन लोगों को एकेडमी से बाहर कर दिया जाएगा। परमाणु युद्ध की आशंका के चलते वे लोग डरे हुए हैं। बच्चे भी घर लौटने को छटपटा रहे हैं। एकेडमी बच्चों को कही जाने की अनुमति नहीं दे रही। बताया कि वे लोग भारतीय दूतावास और भारत सरकार से संपर्क करने की कोशिश में लगे हैं।
अभी हंगरी में ही है पुलकित
बुधवार को यूक्रेन से हंगरी पहुंचे पुलकित भारद्वाज की वतन वापसी का अभी कोई समय तय नहीं हो सका है। पुलकित के अनुसार, उससे पहले वहां पहुंचे कई अन्य छात्र-छात्राएं घर वापसी के इंतजार में हैं। पुलकित भारद्वाज यूक्रेन के किवी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस तृतीय वर्ष का छात्र है। युद्ध शुरू होने के बाद से उसके उसके सहित करीब दो सौ छात्र-छात्राओं को कॉलेज के पास ही बने बंकर में रखा गया था।