शाहजहांपुर/सिंधौली। सिंधौली के छोटे-से गांव महाऊदुर्ग से कोच अजयपाल वेटलिफ्टिंग खिलाड़ियों की नई पौध तैयार कर रहे हैं। अपने बूते जुटाए संसाधनों और खर्च की बदौलत वह आसपास के गांव के बच्चों को नि:शुल्क कोचिंग देकर खेल की बारीकियां सिखा रहे हैं।
सिंधौली के गांव महाऊदुर्ग में कोच अजयपाल (45) लड़केऔर लड़कियों को वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग दे रहे हैं। उनकी मेहनत का फल है कि तीन लड़कियां अब तक राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में मेडल जीत चुकी हैं। अजय पाल बताते हैं कि वर्ष 2000 में जीएफ कॉलेज में पढ़ने के दौरान वह स्पोर्ट्स स्टेडियम के क्रीड़ाधिकारी और पूर्व वेटलिफ्टिंग खिलाड़ी श्यामसुंदर मिश्रा के संपर्क में आए। उन्हीं की प्रेरणा से उन्होंने वेटलिफ्टिंग शुरू की। तीन बार स्टेट लेवल की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और अब नेशनल के लिए तैयारी कर रहे हैं।
अजयपाल के मुताबिक उन्होंने देखा कि ग्रामीण इलाकों में वेटलिफ्टिंग को लेकर कोई क्रेज नहीं है। पांच-छह साल पहले उन्होंने आसपास के बच्चों को इकट्ठा कर वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग देना शुरू किया। वर्तमान में आठ लड़कियां और 12 लड़के वेटलिफ्टिंग का अभ्यास गांव में ही कर रहे हैं। अजयपाल विभिन्न प्रतिस्पर्द्धाओं में बच्चों के शामिल होने के दौरान आने-जाने का खर्च भी खुद वहन करते हैं। हाल में ही हुई बरेली मंडल की वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में चार बच्चों ने गोल्ड जीते। आदमपुर उत्तरी निवासी हरिराम वर्मा वेटलिफ्टिंग फेडरेशन के सदस्य हैं। बताया कि जनप्रतिनिधि भी बच्चों की खेल में कोई मदद नहीं करते। अपने पैसों से इनाम वितरण करता हूं, ताकि बच्चों का मनोबल बढ़ सके।
तीन साल से वेटलिफ्टिंग सीख रही हूं। अजय सर ने संसाधन जुटाए हैं। राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुकी हैं। अब आगे बढ़ने का इरादा है। सरकार ध्यान दे तो ग्रामीण इलाकों में भी अच्छी प्रतिभा है।
नेहा (15), महाऊदुर्ग
पांच साल से वेटलिफ्टिंग का अभ्यास कर रही हूं। राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में कांस्य मिला था अब गोल्ड और नेशनल की तैयारी कर रही हूं। थोड़ी सरकारी मदद मिल जाए तो खेल बेहतर हो सकता है।
निकिता वर्मा (16), महाऊदुर्ग
सालभर पहले अजय सर की प्रेरणा से वेटलिफ्टिंग की प्रैक्टिस शुरू की थी। सांसद खेल स्पर्द्धा में जिले में दूसरा स्थान मिला था, लेकिन कोई पुरस्कार राशि नहीं मिली। अजय सर ही मदद करते हैं।
शालू वर्मा (16), आदमपुर उत्तरी।
राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक मिला था। जिले में कोई मदद खेल के लिए नहीं मिलती है। खासतौर पर महिला खिलाड़ियों के लिए सरकार को मदद करनी चाहिए।
खुशबू वर्मा (14), महाऊदुर्ग
पिता अजयपाल मेरे कोच भी हैं। लखनऊ में हुई प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता था। गांव के स्कूल में अभ्यास करती हूं। वेटलिफ्टिंग जैसे खेलों को भी मदद मिलनी चाहिए।
रोली वर्मा (13), महाऊदुर्ग
एक साल से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद जनपद स्तर पर दो मेडल प्राप्त हो चुके हैं। लगातार तैयारी कर रही हूं। यहां से चयन होने के बाद राज्य स्तर पर खेलने जाऊंगी। ओलंपिक खेलने का सपना है मगर सरकार से मार्गदर्शन और मदद की अपेक्षा है।
कौशल्या (14), महाऊदुर्ग
वेटलिफ्टिंग सीखते हुए पांच साल हो गए हैं। राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए अगर खिलाड़ियों को सरकार बढ़ाना चाहती है तो उसी लेवल के ट्रेनिंग और संसाधन की जरूरत है।
दीपक वर्मा (18), महाऊदुर्ग
जिले में वेटलिफ्टिंग को लेकर बहुत क्रेज नहीं है। यह व्यक्तिगत लेकिन बहुत शारीरिक शक्ति, तकनीक और बैलेंस का खेल होता है, जिसमें महारत हासिल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने का मौका होता है। इसलिए बच्चों को दस साल की उम्र से ट्रेनिंग शुरू करा दी जाती है। सरकार अगर थोड़ा भी ध्यान दे तो ग्रामीण इलाकों से ओलंपिक तक का सफर करने वाली प्रतिभाएं निकल सकती हैं।
अजयपाल, वेटलिफ्टिंग कोच