कोहरे के बीच शाहजहांपुर में बरेली-फर्रूखाबाद हाईवे पर अल्हागंज इलाके में सुगसुगी गांव के पास बृहस्पतिवार सुबह कंटेनर की टक्कर से टेंपो चालक और उसमें सवार सभी 11 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। इनमें एक बच्चा और तीन महिलाएं शामिल हैं। मदनापुर के गांव दमगड़ा और लहसना के ये लोग पौष पूर्णिमा पर गंगा स्नान के लिए फर्रुखाबाद के पांचाल घाट जा रहे थे। हादसे के बाद चालक कंटेनर को जलालाबाद क्षेत्र में छोड़कर भाग गया।
टेंपो चालक अनंतराम समेत नौ लोग सुबह करीब नौ बजे दमगड़ा गांव से रवाना हुए थे। रास्ते में लहसना की रामलली और मेघवती भी अपने पौत्र राहुल के साथ टेंपो में सवार हो गईं। टेंपो करीब 10:30 बजे जब पांचाल घाट से 28 किलोमीटर पहले सुगसुगी गांव के पास पहुंचा तभी गलत साइड में आ रहे तेज रफ्तार कंटेनर ने जोरदार टक्कर मार दी। इससे टेंपो के परखचे उड़ गए। हादसे में टेंपो सवार सभी लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
ऑटो में सवार थे दादी-पौत्र, दोनों की चली गई जान
हादसे में मदनापुर के लहसना गांव निवासी मेघवती (70) और उनके पौत्र राहुल (12) की मौत हो गई। दादी अपने पौत्र को सर्दी से बचाने के लिए शॉल ओढ़ाकर बैठी थीं। धार्मिक प्रवृत्ति की होने की वजह से मेघवती अक्सर गंगा स्नान के लिए जाती रहती थीं।
बृहस्पतिवार को उनके पुत्र देवेंद्र का बेटा राहुल भी उनके साथ चलने की जिद करने लगा। जबकि, सर्दी के चलते उन्होंने मना किया था लेकिन वह नहीं माना। बृहस्पतिवार को दादी-पौत्र और गांव की ही रामलली दियूरा मोड़ के पास सवारी का इंतजार करने लगे। उनके घर से निकलने के कुछ देर बाद ही मेघवती व राहुल की मौत की खबर परिजन को मिल गई।
हादसे की सूचना पर परिजन विलाप करने लगे। इसके बाद पुलिस से संपर्क साधा, तब उन्हें शव राजकीय मेडिकल कॉलेज में होने की जानकारी मिली। मेघवती की मौत से बेटे देवेंद्र, रामसेवक व देशराज और दो बेटियों महेश्वरी देवी व रामगुनी का रो-रोकर बुरा हाल है। राहुल कक्षा छह में गांव के निजी स्कूल में पढ़ता था।
वह तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। मां रेनू, बहन मनोरमा व भाई मोहित शव देखकर बिलख पड़े। साठ वर्षीय रामलली के पति ऋषिपाल की मौत काफी पहले हो चुकी है। उनके दो बेटे भी अब इस दुनिया में नहीं हैं। रामलली गांव की ही मेघवती के साथ घर में ताला डालकर गंगा स्नान के लिए निकली थीं। उनकी एक बेटी सुनीता है जिसकी शादी हो चुकी है।
लंकुश की मौत से बिलख पड़े परिजन
लंकुश तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। वह मेहनत-मजदूरी कर पांच बेटों और तीन बेटियों का भरण पोषण कर रहे थे। बृहस्पतिवार को थाने से कॉल कर हादसे की सूचना दी गई, जिसके बाद परिवार के लोग पोस्टमार्टम हाउस की ओर चल दिए। मृतका की पत्नी रूपरानी ने बताया कि बेटे रिंकू और नीलम का विवाह हुआ था। हरिओम, अवधेश, प्रताप, कृष्णा, कुसुम का विवाह नहीं हुआ था। परिवार के मुखिया की मौत से मातम छाया हुआ है।
रामलली के जरिये था दमगड़ा और लहसुना गांव में कनेक्शन
मदनापुर के दमगड़ा और जलालाबाद का लहसुना गांव में रामलली के जरिये ही कनेक्शन सामने आया है। ऑटो मालिक अनंतराम की ननिहाल लहसुना गांव में है। इसके चलते मामी रामलली (65) को गंगा स्नान के लिए ले जाने की चर्चा हुई थी। इस बीच गांव की मेघवती से बात हुई तो वह भी राजी हो गईं। इसके बाद मेघवती और उनका 12 साल का पौत्र राहुल व रामलली बुधवार की सुबह दियूरा गांव के पास अनंतराम के ऑटो में सवार हो गए थे। कुछ देर बाद ही हादसे की सूचना आ गई थी। रामलली अपने भतीजे आदेश के पास रहती थीं।
चीख-पुकार से टूटता रहा दमगड़ा में पसरा मातमी सन्नाटा
जलालाबाद से करीब 25 किलोमीटर दूर मदनापुर ब्लाॅक की ग्राम पंचायत सैनाखेड़ा के मजरा दमगड़ा बृहस्पतिवार को गम के सागर में डूबा हुआ था। पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ था जिसे घरों से आती महिलाओं के रोने की आवाज तोड़ रही थी। छह परिवार के नौ सदस्यों को खोने के बाद पूरा गांव मातम में डूबा रहा।
दमगड़ा गांव कश्यप बिरादरी बहुल है। इस गांव के जिन नौ लोगों की सुगसुगी के पास हुए सड़क हादसे में मौत हुई, वे सभी लोग इसी बिरादरी के थे। बमुश्किल छह सौ की आबादी वाले इस मजरे के ज्यादातर लोग खेती-किसानी करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। बृहस्पतिवार सुबह आम दिनों की तरह ही लोग अपनी सुबह की दिनचर्या निपटा रहे थे।
पूर्वाह्न करीब सवा 11 बजे सियाराम के भाई हरिश्चंद्र के मोबाइल पर किसी ने हादसे की खबर दी। इसके बाद यह खबर आग की तरह पूरे गांव में फैल गई। सभी लोग कामकाज छोड़कर हादसे के बारे में जानने के लिए एक-दूसरे से संपर्क करने लगे। गांव के तमाम लोग घटनास्थल के लिए निकल पड़े। कुछ ही देर में गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया।
हादसे में जान गंवाने वाले सभी लोगों के घर बमुश्किल सौ मीटर के दायरे में हैं। हादसे की जानकारी के बाद इन घरों से महिलाओं की रह-रहकर उठतीं चीखें ही कुछ देर के लिए इन सन्नाटे को चीर रही थीं। ज्यादातर पुरुष घटनास्थल पर पहुंचने के बाद पोस्टमार्टम हाउस को रवाना हो गए। पीड़ित घरों में बच्चों-महिलाओं को संभालने वाला भी कोई नहीं बचा था। गांव में तैनात किए गये पुलिसकर्मियों के आसपास गांव के बच्चे ही नजर आ रहे हैं। किसी घर में सगे भाइयों, किसी घर में मां-बेटे की मौत से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
कैसे पीले होंगे बेटी के हाथ
सगे भाई लालाराम और पुत्तूलाल की इस हादसे में हुई मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पुत्तूलाल के चार बेटियों और पांच बेटों का बड़ा परिवार है। करीब दस बीघा खेती ही पुत्तूलाल के परिवार का गुजरबसर का जरिया थी। बड़ी बेटी तारावती की उन्होंने शादी तय कर दी थी। शादी मई में है।
गोद भराई की रस्म पूरी हो जाने के बाद से वह इसको लेकर तैयारियों में जुट गए थे। उनकी मौत की खबर पाने के बाद से उनकी पत्नी रामवती कई बार बेहोश हो चुकी है। होश में आने पर वह बार-बार यही कहकर चीत्कार कर उठती हैं कि अब उसकी बेटी के हाथ कैसे पीले होंगे। दूसरे भाई लालाराम के सात बच्चे हैं जिनमें पांच बेटे व दो बेटियां हैं। लालाराम भी अपने घर के कमाऊ सदस्य थे।
परिजनों को मुहैया कराया अनाज
गांव में मौजूद तहसीलदार जयप्रकाश यादव ने बताया कि पीड़ित सभी छह परिवारों को 50 किलो दाल, चावल, आटा के साथ ही तेल, नमक आदि खानपान की सामग्री उपलब्ध कराई गई है। शासन की मंशा के अनुरूप सभी की अंत्येष्टि के लिए घी सामग्री लकड़ी की भी व्यवस्था प्रशासन की ओर से की गई है। एसडीएम तहसीलदार व अन्य राजस्वकर्मी गांव में मौजूद हैं।