डीएम शुभ्रा सक्सेना ने शुक्रवार को विकास भवन सभागार में प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक करके जिले में स्कूल-कॉलेजों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों और शिक्षण संस्थाओं के प्रतिनिधियों को स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए वहां सीसीटीवी कैमरे लगवाने के निर्देश दिए।
यह कवायद पाकिस्तान के आर्मी स्कूल में हुई आतंकी घटना के मद्देनजर हुई। बैठक में शिक्षण संस्थाओं के संचालकों ने कहा कि राजनीतिक दलों से जुड़े लोग अक्सर अपने हथियार बंद समर्थकों के साथ स्कूल में पढ़ने वाले अपने बच्चों से मिलने आ जाते हैं और शस्त्र लेकर आने से मना करने पर भी नहीं मानते। इसे गंभीरता से लेते हुए डीएम ने कहा कि शिक्षण संस्थाओं की सौ मीटर परिधि में निषेधाज्ञा (धारा 144) प्रभावी रहेगी। यानी इस दायरे में शस्त्र लेकर आने वाले अभिभावकों या अन्य किसी के भी खिलाफ वैधानिक कार्रवाई के साथ उनके शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिए जाएंगे।
डीएम ने स्कूल संचालकों को मेन गेट पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के साथ तीन दिन के अंदर सुरक्षा गार्ड नियुक्त कर उनके नाम-पते सहित पूरी जानकारी उपलब्ध कराएं। डीएम ने कहा कि स्कूली वाहन चालकों का विवरण भी सभी शिक्षण संस्थाएं दो दिन के अंदर दें, जिससे कि उनका पुलिस स्तर से सत्यापन कराया जा सके। उन्होंने सभी होटलों, शॉपिंग मॉल्स, सिनेमा हाल, जिला अस्पताल आदि सार्वजनिक महत्व के ठिकानों पर भी सुरक्षा के उपरोक्त प्रबंध जल्दी करने के निर्देश दिए। यह भी कहा कि संस्थानों के बाहर इस आशय के बोर्ड भी लगवाएं कि आप सीसीटीवी कैमरे की निगाह में हैं।
एसपी आरपीएस यादव ने भी इस व्यवस्था को जरूरी बताते हुए मातहतों को उचित कदम उठाने का निर्देश दिया। बैठक में एडीएम मुनेंद्र नाथ उपाध्याय, एसपी सिटी एपी सिंह आदि अधिकारी मौजूद रहे।
एडेड स्कूल में इंतजाम के सवाल पर बीएसए निरुत्तर
स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के मुद्दे पर शासन से सहायता प्राप्त गुरुनानक पाठशाला कन्या हाईस्कूल के प्रबंधक गुरप्रकाश सिंह ने सवाल किया कि एडेड शिक्षण संस्थाएं किस स्रोत से सीसीटीवी कैमरे लगवाएं? डीएम ने डीआईओएस राकेश कुमार पर निगाह डाली, लेकिन डीआईओएस ने गेंद बीएसए राजेश कुमार के पाले में फेंक दी। बीएसए ने माना कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत कक्षा एक से आठ तक के बच्चों से कोई शुल्क नहीं लिया जा सकता। स्कूल प्रबंधक ने कहा कि अगर अधिकारी लिखकर दें तो बच्चों से अतिरिक्त शुल्क लेकर कैमरे और गार्ड की व्यवस्था संभव है। इस पर बीएसए चुप्पी साध गए, लेकिन एसपी ने स्पष्ट किया कि स्कूल-कॉलेजों में जो संसाधन उपलब्ध हैं, उन्हें उसी से सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं करनी होंगी।