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प्रभु यीशु के संदेश आज की सबसे बड़ी जरूरत

Fri, 26 Dec 2014 12:30 AM IST
शाहजहांपुर
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प्रभु यीशु मसीह का जन्मदिन सेंट्रल मैथोडिस्ट चर्च में विशेष आराधना के साथ धूमधाम से मनाया गया। चर्च में सुबह से ही धूप के साथ खिले चेहरे आने वालों का स्वागत ‘मेरी क्रिसमस’ कहकर कर रहे थे। चर्च के अंदर और बाहर मेला जैसा माहौल त्योहार की खुशियों को और भी बढ़ा रहा था।
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चर्च में मुख्य पादरी अशोक श्रेष्ठा ने विशेष प्रार्थना कराई। हाथों में बाइबिल पकड़े पुरुष-महिलाएं और युवा ईसा मसीह को याद करने लगे। प्रभु के धरती पर अवतरण के उद्देश्यों और संदेशों को दोहराते हुए पादरी श्रेष्ठा ने श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि वह निर्धनों, असहायों, लाचारों और अन्य जरूरतमंदों की मदद करें, ताकि पृथ्वी पर सुख-शांति बनी रहे। हम सभी शांति से भाईचारा का निर्वहन करते रहें, जो आज की जरूरत भी है और यही संदेश प्रभु यीशु का भी था।
इस अवसर पर कैरल सिंगिंग ग्रुप के सदस्यों तथा अन्य लोगों ने गीतों के माध्यम से यीशु का गुणगान किया। भजन-गीत के बाद ये प्रस्तुतियां देने वालों को पास्टर ईएम पॉल और सुरेश मिल्टन तथा चर्च महिला समिति की सदस्यों ने पुरस्कृत भी किया। इस अवसर पर एनटीआई के डायरेक्टर डॉ. आशीष मैसी, सपना मैसी, चेयरमैन तनवीर खां, प्रधानाचार्य आरपी राम, ओपी दास आदि ने ईसा मसीह के आदर्शों पर चलने का संकल्प दिलाते हुए सभी को क्रिसमस की बधाई दी। इसके बाद दुआ मांगने वालों का चर्च में तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने मोमबत्तियां जलाकर और गुलाब के  फूल अर्पित कर प्रभु यीशु को नमन किया।
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झांकी के समक्ष जलाईं मोमबत्तियां
चर्च के दक्षिणी भाग में ईसा मसीह के जन्म पर आधारित विशाल झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और बच्चों ने झांकी के समक्ष मोमबत्तियां जलाकर प्रभु से आशीष मांगा। साथ ही झांकी की फोटो भी खूब उतारी। दिनभर लोग कैमरे तथा मोबाइल से फोटो खींचते देखे गए।

खूब हुई गुलाब के फूलों की बिक्री
चर्च के बाहर रंग-बिरंगे गुब्बारों, गुलाब के फूलों तथा फूलों के बुकों की जमकर बिक्री हुई। हालत यह थी कि  पांच से दस रुपये तक एक-एक फूल बेचा गया। इस मौके पर दूसरे धर्मों के युवाओं और किशोरों ने भी फूल खरीदकर अपने मित्रों को भेंटकर क्रिसमस की बधाई दी। साथ ही मोमबत्तियों की बिक्री ने भी खूब हुई। चर्च में पहुंचने वाले युवा मोमबत्तियां जलाकर प्रभु को याद कर रहे थे।

दिनभर चला मेल-मिलाप का दौर
प्रार्थना सभा के बाद लोगों ने एक-दूसरे के घरों पर जाकर क्रिसमस की बधाई दी। इस दौरान घरों में होली जैसा माहौल रहा। केक के साथ तमाम प्रकार के व्यंजन अतिथियों के स्वागत के लिए तैयार किए गए थे, जिनका सभी ने जमकर लुत्फ लिया। मेल-मिलाप का यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा।
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