शाहजहांपुर। मुमुक्षु आश्रम में आयोजित श्रीरामकथा में बुधवार को कथा व्यास विजय कौशल ने कहा कि यदि जीवन में श्रद्धा है तो संत स्वयं चले आते हैं, उन्हें बुलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने भगवान शिव-पार्वती विवाह के प्रसंग का मनमोहक वर्णन किया।
कथाव्यास ने कहा कि नारद ने पार्वती की हस्तरेखाओं को देखकर कहा कि यदि वह गहन तप करें तो शिव उन्हें पति के रूप में प्राप्त होंगे। इस पर पार्वती की मां मैना चिंतित हो उठीं कि उनकी बेटी इतनी कम उम्र में तप कैसे करेगी। इस पर देवर्षि नारद ने कहा कि वरण एवं मरण व्यक्ति को स्वयं ही तय करने पड़ते हैं।
उन्होंने मैना को समझाया कि पार्वती साक्षात जगदंबा है एवं शिव ही उनके पति होंगे। इसके बाद कथाव्यास ने शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग बड़े ही मनमोहक अंदाज में सुनाया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की बरात में उनके अघोरी रूप, भस्म लेपन, गले में सांप और भूत-प्रेतों की टोली देखकर पार्वती की मां मैना और अन्य लोग डर से मूर्छित हो गए थे।
बाद में माता पार्वती के अनुरोध पर शिवजी ने सुंदर रूप धारण किया। अंततः उनका विवाह विधि विधान से संपन्न हुआ। कथाव्यास ने भगवान श्रीकृष्ण एवं सुदामा के मिलन का मार्मिक प्रसंग प्रस्तुत किया।
संजीव बंसल एवं कल्पना बंसल दूसरे दिन कथा के मुख्य यजमान रहे। इसके अतिरिक्त कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर आरके आजाद एवं रश्मि आजाद ने भी पूजन एवं आरती की। कथा के दौरान मंच पर मुमुक्षु शिक्षा संकुल के मुख्य अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी सर्वेश्वरानंद एवं स्वामी गंगेश्वरानंद उपस्थित रहे।
नगर आयुक्त डॉ. बिपिन कुमार मिश्रा, बृजेश पांडेय, डॉ. केके शुक्ला, डॉ. सत्यप्रकाश मिश्रा, रामचंद्र सिंघल, अशोक अग्रवाल, प्रबंध समिति के सचिव प्रो. अवनीश मिश्रा, क्रीड़ा सचिव प्रो. अजीत सिंह चारग, प्रो. प्रभात शुक्ला आदि मौजूद रहे।
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किया गया गुरुपूजन
मुमुक्षु महोत्सव के द्वितीय दिवस का शुभारंभ गुरु पूजन कार्यक्रम से हुआ। अमरकंटक से आए महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद ने स्वामी शुकदेवानंद की प्रतिमा के समक्ष गुरुपूजन किया। पूजन कराने वालों में आदेश पांडेय, ललित शुक्ला आदि रहे। इस अवसर पर स्वामी अभेदानंद सरस्वती, स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती, स्वामी गंगेश्वरानंद उपस्थित रहे। पूजन के उपरांत रुद्राष्टाध्यायी के पाठ के साथ रुद्र महायज्ञ प्रारंभ हुआ।
मुमुक्षु आश्रम में रामकथा सुनाते विजय कौशल। स्रोत : आयोजक