हरिओम त्रिवेदी
पुवायां। खुटार के गांव मलिका निवासी साधना शुक्ला संघर्षशील महिलाओं की लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं। उन्होंने यह कर दिखाया है कि छोटा काम शुरू कर बड़े लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं। बीसी सखी साधना शुक्ला को उत्कृष्ट कार्य के लिए लखनऊ में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या सम्मानित भी कर चुके हैं। उन्होंने एक वर्ष में चार करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन कराकर जिले में प्रथम स्थान पाया है। पिछले नौ महीने से भी वह लगातार जिले की बीसी सखियों में पहले पायदान पर बनी हुई हैं।
स्नातक तक शिक्षित साधना शुक्ला बताती हैं कि उनके पति उपेंद्र शुक्ला एक प्राइवेट कंपनी में काम करते थे। कोरोना काल में मई 2020 में उनकी नौकरी छूट गई। जून 2020 में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से बीसी सखी के नाम से एक नौकरी का विज्ञापन देखा। साधना ने मोबाइल पर यूपी बीसी सखी का एप्लीकेशन डाउनलोड कर आवेदन कर दिया। 30 जनवरी, 2021 को उन्हें अपनी ग्राम पंचायत में बीसी सखी के रूप में चयनित होने की जानकारी मिली तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
मार्च 2021 में बड़ौदा स्वरोजगार संस्थान में छह दिन की ट्रेनिंग करने के बाद उन्होंने आईआईबीएफ (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस) की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद प्रदेश सरकार की ओर से उन्हें लेन-देन और एक डिवाइस के लिए 75000 रुपये भी दिए गए। 25 सितंबर, 2021 को उन्होंने बीसी सखी के रूप में कार्य शुरू किया था। वह जिले की बीसी सखियों में पिछले नौ महीनों से लेन-देन और कमीशन में प्रथम स्थान पर हैं। मार्च 2022 में उनको बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से पुरस्कृत किया गया था। 28 जून को लखनऊ में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उन्हें उत्कृष्ट कार्य के लिए स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। संवाद
ये है बीसी सखी योजना
उप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को रोजगार देने के लिए प्रदेश सरकार ने यह योजना 22 मई 2020 को शुरू की। ग्रामीण महिलाओं को लाभ पहुंचाने के लिए योजना के तहत गांवों में बीसी (बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट ) सखी तैनात की गईं। बीसी सखी का मुख्य कार्य घर-घर जाकर बैंक खाते मेें राशि जमा करना और निकालना है। सरकार की ओर से इन्हें छह महीने तक चार हजार रुपये प्रति माह दिए जाते हैं। साथ ही लेन-देन पर कमीशन भी दिया जाता है।
शुरुआत में हुई कुछ परेशानी, अब लोगों को विश्वास
साधना शुक्ला के अनुसार शुरुआत में उनको कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ा। फिर धीरे-धीरे लोगों में विश्वास बढ़ा, खासकर महिलाएं और बुजुर्ग जो बैंक जाने से कतराते थे। बैंकों में लंबी लाइन और अशिक्षित होने के कारण तो कुछ महिलाएं घूंघट के कारण बैंक जाना नहीं चाहती थीं। वे बेझिझक सुबह से शाम तक लेन-देन करती हैं।
महिलाओं को मिल रहा योजनाओं का लाभ
साधना शुक्ला गांव की महिलाओं को सरकार की ओर से संचालित सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना आदि का लाभ दिला रही हैं। महिलाओं को अपनी बचत का पैसा घर में रखने के स्थान पर बैंक में जमा करने और छोटी-छोटी बचत करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इससे तमाम महिलाओं ने बचत की है और उनके जीवन स्तर में सुधार हो रहा है।