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बारिश में जर्जर बिजली नेटवर्क से खतरा बढ़ा

Mon, 03 Jul 2017 12:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर
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मानसून के सीजन की शुरुआत के साथ शहर में बिजली के जर्जर नेटवर्क से हादसे होने की आशंका फिर पैदा हो गई है। बिजली के तमाम पोल नीचे से गलकर कमजोर हो चुके हैं। लाइनें ढीली होकर नीचे लटक रही हैं। सड़कों के किनारे खुले स्थानों पर रखे गए ट्रांसफार्मरों से बारिश के दौरान उनसे करंट फैलने का खतरा फिर बढ़ गया है। पहले भी कई पशु ऐसे ट्रांसफार्मरों से करंट की चपेट में आ चुके हैं। कई जगहों पर फाउंडेशन के नाम पर ईंटों के कम ऊंचाई के चबूतरे पर ट्रांसफार्मर रखे हैं और उनके आसपास कटीले तारों की फैंसिंग भी नहीं की गई है। 
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शहर का बिजली नेटवर्क 25 से लेकर 630 केवी क्षमता वाले 509 ट्रांसफार्मरों पर टिका है। पांच वर्ष पहले तक शहर में 398 ट्रांसफार्मर लगे थे। उस वक्त शहर में लगभग 40 हजार उपभोक्ता थे। अब कनेक्शन बढ़कर करीब 60 हजार से अधिक हो चुके हैं। उसी अनुपात में विभिन्न क्षमता वाले 74 ट्रांसफार्मर बढ़ाए गए। यही नहीं, एपीडीआरपी स्कीम के दूसरे चरण में कार्यदायी संस्था द्वारा किए जा रहे शहरी नेटवर्क के अपग्रेडेशन के तहत करीब 50 नए ट्रांसफार्मर और लगाए गए।
पॉवर कारपोरेशन के नियमानुसार 250 केवी और इससे अधिक क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों को कम से कम तीन फुट ऊंचे कंक्रीट के फाउंडेशन पर रखने के साथ उनके चारों ओर चार से पांच फुट ऊंचाई वाली तारोें की बाड़ लगाना अनिवार्य है। स्थिति यह है कि पहले से लगे कई ट्रांसफार्मरों के न तो अब तक मानक के अनुरूप फाउंडेशन बन पाए हैं और न ही उनकी फैंसिंग से घेराबंदी की गई है। सड़कों के किनारे फुटपाथ पर ईंटों का चबूतरा बनाकर रखे गए बगैर बाड़ वाले ट्रांसफार्मरों के आसपास उगी घास चरने के लोभ में अक्सर पशु करंट की चपेट में आकर अपनी जान गवां देते हैं। खास यह है कि ट्रांसफार्मरों की फैंसिंग के लिए विभाग को अलग से कोई बजट नहीं मिलता। 
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