इस्लामियां स्कूल के पास स्थित मस्जिद। संवाद
शाहजहांपुर। रहमतों और बरकतों वाला महीना रमजान आ गया है। शनिवार को चांद का दीदार होने की संभावना है। रविवार को पहला रोजा हो सकता है। मुकद्दस रमजान को लेकर लोगों में काफी ज्यादा उत्साह है। घरों से लेकर मस्जिदों तक में तैयारियां शुरू हो गई हैं।
साल के 12 महीनों में रमजान माह मुस्लिमों में खास मायने रखता है। रोजा रखने के साथ ही पूरा माह इबादत में गुजरता है। रमजान को लेकर तैयारियों ने तेजी पकड़ ली है। मस्जिदों में साफ-सफाई के साथ ही तराबीह की नमाज के लिए व्यवस्था की जा रही है। वहीं, बाजार भी गुलजार होने लगी हैं।
दुकानदारों ने सिंवई और फेनी समेत अन्य खाद्य पदार्थों की दुकानें सजाने की तैयारी कर ली है। संभावना है कि शनिवार को रमजान के मुबारक महीने का दीदार हो जाएगा। उसके बाद रविवार को पहला रोजा होगा। शहर काजी सैयद सैफ हसन खां बताते हैं कि पैगंबर-ए-इस्लाम मक्का से मदीना शरीफ तशरीफ लाए तो डेढ़ साल बाद सन 02 हिजरी में एक महीना के रोजे फर्ज हुए। इससे पहले लोग नफिल रोजा रखते थे।
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रोजा रखना फर्ज
-शहर काजी ने बताया कि रमजान में गलतियों को सुधारने का मौका मिलता है। रोजा रखना सभी पर फर्ज है। यह महीना इंसान में प्रेम, भाईचारा व इंसानियत का भी संदेश देता है। रोजा के दौरान झूठ बोलना, चुगली करना, किसी पर बुरी निगाह रखना गलत है। रोजे में हर बुराई से दूर रहना जरूरी है। रोजा हर मुसलमान और बालिग पर फर्ज है। बिना किसी वजह से रोजा छोड़ना सख्त गुनाह है।