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Shahjahanpur News: रामगंगा में उफान... चौतरफा घिरे 50 से ज्यादा गांव

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पशु प्रजनन नियंत्रण केंद्र व श्वान गृह तक पहुंचा गर्रा में आई बाढ़ का पानी। संवाद
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शाहजहांपुर। पहाड़ों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक हुई भारी बारिश का पानी सिमटकर नदियों में आने और बांधों-बैराजों से पानी की निकासी जारी रहने से मंगलवार को रामगंगा में उफान बढ़ गया। फर्रुखाबाद की सीमा पर स्थित जनपद के डबरी घाट पर जलस्तर खतरे के निशान से 50 सेमी ऊपर पहुंच गया। इस कारण जलालाबाद और कलान तहसील के 50 से ज्यादा तटीय गांव चौतरफा बाढ़ से घिर गए हैं।
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सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार नरौरा बैराज से मंगलवार को भी 1.28 लाख क्यूसेक पानी की निकासी जारी रही। इस कारण कलान के भैंसार बांध पर रात में गंगा का जलस्तर सात सेमी और कम हो गया। हालांकि, वहां गंगा खतरे के निशान से सिर्फ 17 सेमी नीचे बह रही है। इसके विपरीत परौर से जलालाबाद और अल्हागंज तक रामगंगा में उफान जारी है। बताया गया कि डबरी घाट पर बीते 24 घंटे में जलस्तर 16 सेमी बढ़ गया है। गनीमत है कि इन दोनों नदियों का जलस्तर मंगलवार सुबह से शाम तक स्थिर रहा।
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गर्रा की बाढ़ से घिरे कई नवनिर्मित सरकारी भवन
शाहजहांपुर। शहर में गर्रा और खन्नौत नदियों में पानी धीरे-धीरे कम होने से उनके आसपास के मोहल्लों और कॉलोनियों में रहने वालों को बाढ़ की आशंका से थोड़ी राहत मिली है। हालांकि, आसपास के इलाकों के रास्तों के दोनों ओर अब तक पानी भरा है। अजीजगंज में पशु प्रजनन नियंत्रण केंद्र एवं श्वान गृह का नवनिर्मित भवन चारों ओर पानी से घिरा है। नगर निगम और शाहजहांपुर विकास प्राधिकरण कार्यालय के चारों ओर बाढ़ है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार बीते 24 घंटे के दौरान गर्रा 85 सेमी घटकर 146.85 मीटरगेज और खन्नौत 15 सेमी कम होकर 143.95 मीटरगेज पर बह रही है। संवाद
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जलालाबाद के तटीय गांवों की तमाम फसलें चौपट
जलालाबाद। नदियों का जलस्तर मंगलवार सुबह से स्थिर रहने से रामगंगा और बहगुल नदियों के करीब तीन दर्जन तटीय गांवों के लोगों को बाढ़ से कोई राहत नहीं मिल सकी। फसलें डूबी होने से किसान बेहद परेशान हैं। कसारी गांव के हरिश्चंद्र, सुरेश, संगहा के गुड्डू यादव, कुंडरा के ओमेंद्र पाल आदि का कहना है कि जिन खेतों में एक सप्ताह से पानी भरा है, उनमें बोई गईं तिल, मूंगफली, मैंथा, रौसा आदि की फसलें बरबाद होना तय है। धान, बाजरा या मक्का की फसलें बचने पर उनकी गुणवत्ता इतनी खराब हो जाएगी कि मंडी में उनकी बिक्री करना कठिन होगा। संवाद
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डबरी घाट के तटीय गांवों का जनजीवन हुआ अस्त-व्यस्त
अल्हागंज। डबरी घाट पर रामगंगा का जलस्तर सोमवार शाम की तुलना में मंगलवार को सुबह तक और बढ़ जाने से आसपास के करीब एक दर्जन गांव टापू में बदल जाने से वहां का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। घाट के समीप भरतौली और रमापुर बझेड़ा के संपर्क मार्ग पानी में डूब जाने से लोगों को घर-गृहस्थी की खरीदारी के लिए गांव से बाहर निकलना कठिन हो गया है। कई ग्रामीणों ने अपना कीमती सामान और पालतू पशु सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिए हैं। तटवर्ती दहेना, गोरा महुआ गाड, चौरसिया, सुगसुगी, साईंपुर, रामपुर, वजीरपुर बंजर, बानपुर गांव के खेतों में भरा पानी अब आबादी क्षेत्र की ओर रुख कर रहा है। बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों के अनुसार उन्हें प्रशासन से अभी कोई राहत नहीं मिली है। संवाद

पशु प्रजनन नियंत्रण केंद्र व श्वान गृह तक पहुंचा गर्रा में आई बाढ़ का पानी। संवाद

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