बुखार से पीड़ित कन्हैया लाल की बृहस्पतिवार को मौत हो गई। उसकी मौत से घर में कोहराम मच गया। सितंबर माह में पुवायां क्षेत्र में बुखार से चौथी मौत होने से लोगों में दहशत है।
गांव लखनापुर के रामपाल के पुत्र अनिल कुमार की सात सितंबर और इसी गांव के नन्हेंलाल की 11 वर्षीय पुत्री सरिता की 11 सितंबर और पुवायां के मोहल्ला परशुराम नगर सुभाषचंद्र गुप्ता की पत्नी सुधा देवी की 20 सितंबर को बुखार से मौत हो चुकी है। पुवायां के मोहल्ला राजीव नगर निवासी 40 वर्षीय कन्हैया लाल कुछ दिनों से बुखार से पीड़ित थे। परिवार के लोग उनका पुवायां में ही निजी डॉक्टरों से इलाज करा रहे थे। बृहस्पतिवार को उनकी मौत हो गई। इससे घर में कोहराम मच गया। बुखार से लगातार हो रही मौतों से लोग दहशत में हैं।
पुवायां के सरकारी अस्पताल में केवल साधारण मलेरिया की जांच की सुविधा उपलब्ध है। सीएमओ के अनुसार डेंगू बुखार की जांच की सुविधा केवल लखनऊ में ही उपलब्ध है। सरकारी अस्पताल में सही दवा नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए तीमारदार अपने रोगियों को प्राइवेट अस्पतालों में ले जाकर इलाज करा रहे हैं।
कन्हैया लाल के सहारे ही होती थी गुजर बसर
पुवायां। कन्हैया लाल की मौत से उनके परिवार के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। भूमिहीन कन्हैया लाल मूलरूप से गांव खंड़ेपुर के रहने वाले थे, लेकिन जमीन आदि नहीं होने के कारण परिवार की गुजर बसर में कठिनाई होने पर वह पुवायां आकर रहने लगे थे। वह वाहन चलाकर परिवार की गुजर करते थे। वह बड़ी पुत्री पूजा की शादी कर चुके थे। कन्हैया की मौत से पत्नी अनिला पर पुत्री ज्योति और पुत्र सूरज की परवरिश आदि का जिम्मा आ पड़ा है। पति की मौत से अनिला की आंखों के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। बड़ी पुत्री पूजा, ज्योति और पुत्र सूरज का भी रो रोकर बुरा हाल है।