शाहजहांपुर। शहर की घनी आबादी के बीचों-बीच मोहल्ला बीबीजई हद्दफ में करीब दो हेक्टेयर में फैला पक्का तालाब भी अन्य तालाबों की तरह बदहाली का शिकार है। लोग कूड़ा डालकर तालाब पाट रहे हैं, लेकिन ऐसे लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण तालाब का आकार लगातार सिकुड़ता जा रहा है।
बुजुर्ग बताते है कि मुगल सिपहसालारों द्वारा शहर की बसावट किए जाने के समय से मोहल्ला बीबीजई हद्दफ मेें यह तालाब विस्तार लिए हुए है। राजस्व अभिलेखों में सुन्नी सेंट्रल बोर्ड की वक्फ संपत्ति के तौर पर दर्ज इस तालाब के तीन ओर मकान बने हैं और दक्षिण दिशा में एप्रोच रोड है। इस तालाब के कारण मोहल्ले का नाम पुख्ता तालाब पड़ गया। रोड साइड में तालाब का किनारा सुरक्षित है, लेकिन बसावट वाली बाकी तीन दिशाओं से कई लोग मकानों के पीछे तालाब की ओर बढ़ गए हैं। देखरेख के अभाव में तालाब में पानी दलदल में बदल गया है।
हाईकोर्ट के आदेश पर हुई थी तालाब की माप
तीन वर्ष पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा एक मामले में सुनवाई के बाद प्रदेश सरकार को वर्ष 1951-52 के राजस्व रिकार्ड मेें दर्ज तालाबों की मूल स्वरूप में बहाली कराने के आदेश दिए हैं। पक्का तालाब की नाप भी कराई गई, लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
राजस्व रिकार्ड में आठ हजार से अधिक तालाब
- राजस्व रिकार्ड में मौजूदा वक्त करीब आठ हजार से अधिक तालाब दर्ज हैं, लेकिन उनमें से महानगर के कई पुराने तालाबों को शहर का कचरा और कारखानों की राख डालकर उनका अस्तित्व मिटाया जा रहा है। ऐसे तालाबों मेें में लोधीपुर में खन्नौत नदी के किनारे स्थित तालाब भी शामिल है, जिसकी जमीन तेजी से रिहायशी क्षेत्र में बदल रही है।
कब्जों से संकुचित हो गया परौर का कुंडा तालाब
परोर। पुरानी रियासत के राजमहल के सामने काफी कई बीघा में दशकों पुराना कुंडा तालाब फैला था, लेकिन तालाब के हिस्से की जमीनों पर कई लोगों ने कब्जा करके उसे संकुचित बना दिया है। परोर के राजा स्व. अजय कुमार सिंह ने तालाब को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए काफी प्रयास किए। कई बार राजस्व विभाग की टीमें आई और जेसीबी से कब्जा हटाने की प्रक्रिया भी शुरू हुई, लेकिन कोई न कोई अड़चन आ जाने के कारण तालाब अतिक्रमण से मुक्त नहीं हो सका और न ही उसका सौंदर्यीकरण हो पाया।
तालाब जस की तस हालत में कई साल से पड़ा है। पहले तालाब में भारी मात्रा में पानी भरा रहता था, जिसे पीकर पशु पक्षी अपनी प्यास बुझाते थे, लेकिन अब उसमें लौकी घास व अतिक्रमण ही दिखाई देता है। तालाब के दूसरी ओर आबादी क्षेत्र में जाने के लिए अंग्रेजी शासन काल में पुलिया का निर्माण कराया गया था, लेकिन वह भी टूट गई। पुलिया की मरम्मत की तरफ भी अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया गया। क्षेत्रवासियों ने तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराकर सौंदर्य करण कराए जाने की मांग की है। संवाद
दस अमृत सरोवरों के निर्माण को हुआ भूमि पूजन
शाहजहांपुर। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की योजना के तहत जिले में ऐसे 71 तालाब अमृत सरोवर के तौर पर विकसित करने को चिह्नित किए हैं, जिनका क्षेत्रफल कम से कम एक एकड़ (0.4 हेक्टेयर) है और जिनमें कम से कम दस हजार क्यूबिक मीटर पानी भरने की क्षमता है। शुरुआत मेें ऐसे दस सरोवर तैयार करने के लिए सीडीओ श्याम बहादुर सिंह ने शुक्रवार को उनका भूमि पूजन कराया।
जिन तालाबों के लिए भूमि पूजन हुआ, उनमें कांट ब्लॉक में ग्राम पंचायत भंडेरी, ददरौल में गुलामखेड़ा, खुदागंज में मझिला, खुटार में सिउरा खुर्द कलां, कलान में रमपुरा ताल्लुके बरा, जलालाबाद में भटा देवर, जैतीपुर में बिनौरा बिनौरिया, भावलखेड़ा में ददऊ, सिंधौली में अनावा और मदनापुर ब्लॉक में ग्राम पंचायत बरी खास के तालाब शामिल हैं। इस मौके पर ग्रामीणों समेत संबंधित खंड विकास अधिकारी, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, ग्राम पंचायत सचिव, रोजगार सेवक आदि मौजूद रहे। संवाद
शासन से मिली गाइडलाइन के अनुसार इस वर्ष जनपद में 20 अमृत सरोवर आगामी 15 अगस्त तक तैयार कराने का लक्ष्य है और शेष सरोवर अगले वित्त वर्ष तक पूरे होंगे। शहरी क्षेत्रों समेत गांवों के तालाबों से कब्जे हटाकर उनके स्वरूप को संवारना शासन-प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में है। डीएम के निर्देश पर तालाबों, चरागाहों और अन्य सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटाने का अभियान शुरू हो चुका है। -श्याम बहादुर सिंह, मुख्य विकास अधिकारी
शाहजहांपुर के पक्का तालाब में मकान बनाकर लोगो ने किया कब्जा। संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR