समीक्षा बैठक में बोले प्रभारी मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी
अफसरों के खिलाफ कई जनप्रतिनिधि रहे खासे मुखर
प्रदेश के दुग्ध विकास एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने बृहस्पतिवार को विकास भवन सभागार में विकास और निर्माण योजनाओं की विभागवार समीक्षा करते हुए अधिकारियों को नौकरी करने की मानसिकता त्यागकर मानवता के आधार पर जनता की सेवा करने का पाठ पढ़ाया। उन्होेंने कहा कि तहसील दिवस और समाधान दिवस का उद्देश्य केवल शिकायतोें की संख्या घटाना नहीं बल्कि लोगों की समस्याओें का वास्तविक तरीके से समाधान कराना है।
प्रभारी मंत्री की पहली औपचारिक बैठक में शामिल होने के लिए जनप्रतिनिधि और विभिन्न विभागाें के अधिकारी सुबह दस बजे से विकास भवन पहुंचने लगे। प्रभारी मंत्री के आने तक विकास भवन सभागार भर गया। बाद में आने वाले अफसरों को कुर्सियों के लिए इंतजार करना पड़ा। प्रभारी मंत्री ने विधायकों की शिकायतों का संदर्भ लेते हुए अधिकारियों को सरकार की मंशा के अनुरूप अपनी कार्यशैली में सुधार कर उसे जन सापेक्ष बनाने के निर्देश दिए।
करीब साढ़े तीन घंटे तक चली मैराथन बैठक की शुरुआत तहसील दिवस और समाधान दिवस में प्राप्त शिकायतोें के निस्तारण की समीक्षा से हुई। डीएम नरेंद्र सिंह ने बताया कि विभिन्न विभागों से जुड़ी 9236 शिकायतें प्र्राप्त हुई और इनमें से केवल 147 मामले निस्तारित होने शेष बचे हैं। इस पर प्रभारी मंत्री ने तहसील और थाना स्तर पर आयोजित होने वाले विशेष दिवसों के महत्व का अहसास कराते हुए इन दिवसों में प्राप्त समस्याओं का जमीनी स्तर पर निस्तारण कराने के निर्देश दिए।
इन आयोजनों के प्रति विभाग प्रमुखों की बेरुखी को लेकर जन प्रतिनिधि मुखर हुए तो प्रभारी मंत्री का लहजा भी तल्ख हो गया। तिलहर क्षेत्र के विधायक रोशनलाल वर्मा ने अफसरों पर तहसील और समाधान दिवसों समेत सरकारी बैठकों का मखौल बनाने का आरोप लगाते हुुए कहा कि निगोही क्षेत्र पंचायत की बैठक में जल निगम के अधिशासी अभियंता ने अपने स्थान पर चपरासी को भेज दिया। विधायक वीर विक्रम सिंह ने सरकारी आयोजनों को लाइव दिखाने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने का सुझाव दिया।
जिला पंचायत अध्यक्ष अजय प्रताप यादव ने समीक्षा बैठकों में जन प्रतिनिधियों को बुलाने पर जोेर देेतेे हुए कहा कि समाधान के रास्ते जन प्रतिनिधि ही निकालते हैं। इन सभी से सहमति जताते हुए प्र्रभारी मंत्री अफसरों से मुखातिब होकर बोले कि सरकारी बैठकों की मूल मंशा जनता को विभागीय योजनाओं का लाभ पहुंचाने की होती है। उन्होेंने कहा कि पहले जो काम विधायक के एक बार कहनेे पर हो जाते थे, अब उनके लिए पांच बार मंत्री को फोन करना पड़ता है।
प्रभारी मंत्री ने कहा कि डीएम और एसपी स्वयं इसका आकलन करें कि तहसील और थाना स्तर पर निपटने योग्य मामलों की भीड़ उनके आगे क्यों लग रही है। यदि तहसीलदार और सीओ के स्तर से समस्याओं का निस्तारण होने लगेे तो 75 प्रतिशत मामलों का क्षेत्रीय स्तर पर समाधान होे जाएगा।
अफसर नहीं उठाते जन प्रतिनिधियों के फोन
प्रभारी मंत्री द्वारा अधिकारियों को जन सेवा की घुट्टी पिलाए जाने के दौरान डीएम ने बताया कि जन समस्याओं के स्थानीय निस्तारण के लिए अधिकारियोें को सुबह नौ से 11 बजे तक कार्यालयों में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए शुरू किए गए कॉल सेंटर की डीएम ने प्रक्रिया भी समझाई, लेकिन इसी बीच जिला पंचायत अध्यक्ष अजय यादव ने चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि अधिकारियों द्वारा समस्याओं का समाधान करना तो दूर, लोगों की दिक्कतें बताने के लिए फोन करने पर कई अधिकारी कॉल रिसीव नहीं करते। विधायक रोशनलाल वर्मा ने ऐसे कई अफसरों के नाम भी गिनाए। इस पर डीएम ने अधिकारियों को हिदायत दी कि जन प्रतिनिधियों की फोन कॉल जरूर रिसीव करें और तात्कालिक व्यस्तता की स्थिति में बैक कॉल करके उनसे बात अवश्य करें।
विवाह अनुदान से ऋण वसूली नहीं करें बैंक
गेहूं खरीद सीजन में किसानों समेत जन सामान्य को बैंक शाखाओं से कैश पेमेंट में हो रही दिक्कतों का संज्ञान लेते हुए प्रभारी मंत्री श्री चौधरी ने अग्रणी बैंक प्रबंधक वीएम गुप्ता को निर्देश दिया कि आरबीआई से संपर्क करके कृषि प्रधान जिले के लिए अतिरिक्त नगदी की मांग करें और जरूरत पड़ने पर डीएम की सहायता लें। इस दौरान विधायक चेतराम और रोशनलाल वर्मा ने बेटी के विवाह अनुदान के चेक जमा करने वाले किसानों से बैंकोें में ऋण की कटौती कर लिए जाने का उल्लेख किए जाने पर प्रभारी मंत्री संजीदा हो गए। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में बेटी के हाथ पीले करने के लिए पिता न जाने कहां-कहां से रकम जुटाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार से विवाह के लिए आर्थिक सहायता की अपील करने वालों की कमजोेर माली हालत पर तरस खातेे हुए बैंक अधिकारी किसी भी दशा में विवाह अनुदान की धनराशि को ऋण अदायगी में समायोजित नहीं करें।
ग्राम पंचायतों को रिबोर कराने होंगे हैंडपंप
पेयजल संसाधनों की समीक्षा के दौरान जल निगम के अधिशासी अभियंता विनय कुमार पाल ने बताया कि 50 की आबादी पर एक हैंड पंप लगना चाहिए, जिले में औसतन 74 लोगाें पर एक हैंड पंप के हिसाब से कुल 35099 हैंडपंप लगाए गए हैं। एक्सईएन ने यह भी बताया कि हैंडपंप की मामूली खराबियां ग्राम पंचायतोें के स्तर से ठीक कराई जाती हैं और वर्तमान में 2666 हैंड पंपाें को रिबोर कराने के लिए धन की मांग भेजी गई है। इस पर प्रभारी मंत्री ने कैबिनेट के फैसले के आधार पर जारी शासनादेश का हवाला देेतेे हुुए कहा कि ग्राम प्रधानों को अपने स्तर से हैंडपंप रिबोेर कराने होंगे। उन्होंने इसके लिए सीडीओ को ग्राम पंचायतों में धन का हिसाब रखने के लिए अलग हेड खोलनेे के साथ सभी ग्राम प्रधानों को सरकार के इस फैसले से अवगत कराने के निर्देश दिए।
इन विभागों के कामों की हुई समीक्षा
बैठक के दौरान प्रभारी मंत्री ने गेहूं की सरकारी खरीद, आलू खरीद, ग्रामीण विद्युतीकरण की दीनदयाल उपाध्याय योजना, बिजली सप्लाई की स्थिति, सड़कों को गड्ढा मुक्त करने की योजना, सीएचसी व पीएचसी में डॉक्टरों समेत स्टाफ की उपलब्धता, एंबुलेंस सेवाओं की स्थिति, तालाबों के रखरखाव, भूमि संरक्षण के उपायों आदि बिंदुओं की गहन समीक्षा करते हुुए सरकार के दिशा निर्देशों के अनुरूप कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्र पाल सिंह यादव, एसपी केबी सिंह, सीएमओ डॉ. कमल कुमार, सीडीओ टीके शिबु, एडीएम जितेंद्र्र शर्मा और सर्वेश कुमार, भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश मिश्र, महामंत्री डीपी सिंह के अलावा सभी एसडीएम तथा अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।