फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

समस्याओं में निखरा मख्फी की उंगलियों का हुनर

Wed, 02 Mar 2016 12:42 AM IST
शाहजहांपुर।
विज्ञापन
विज्ञापन
 आर्थिक समस्याओं से जूझते हुए शहर की युवा एवं होनहार मख्फी फातिमा को अब अपनी मंजिल साफ तौर पर नजर आने लगी है। मख्फी ने अपनी उंगलियों के हुनर से एक नहीं, बल्कि दो-दो गोल्ड मेडल हासिल कर दिखा दिया है कि यदि मौका मिले तो लड़कियां भी किसी से कम नहीं हैं। वह पेंटिंग को रूह का सुकून मानती है।  
विज्ञापन

मख्फी की कहानी किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है। शहर के मोहल्ला महमंद गढ़ी निवासी अजीजुल हसन खां और समीना खान का परिवार इतना संपन्न नहीं था कि वे अपने बच्चों को उनकी इच्छा के अनुरूप पढ़ा-लिखा सके। उनकी बेटी मख्फी शहर के राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में किसी तरह पढ़ी और अब अपने सपनों को बुन रही थी। वर्ष 2008 में इंटर करने के बाद उसकी मुलाकात एक कार्यक्रम में तत्कालीन डीएम मिनिस्ती एस से हो गई। मौका पाकर मख्फी ने अपने सपनों को साकार करने के लिए डीएम से कुछ फरियाद की। डीएम ने उसकी भावनाओं व जज्बे को समझा और समाजसेवी विनोद अग्रवाल से उसकी मदद करने को कहा।  मख्फी बताती है कि विनोद अंकल ने उनकी मदद कर अलीगढ़ यूनीवर्सिटी के कला संकाय (बीएफए) में प्रवेश दिला दिया। उसके बाद मख्फी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और इस वर्ष मख्फी ने कला परास्नातक (एमएफए) में शानदार प्रदर्शन कर ते हुए न सिर्फ अपनी क्लास में बल्कि फैकल्टी में भी सर्वाधिक अंक हासिल कर दोनों गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिए। विश्वविद्यालय में 27 फरवरी को हुए दीक्षांत समारोह में वहां के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल जमीरुद्दीन शाह ने विशिष्ट अतिथि यूएसए के फखरुल इस्लाम के साथ मख्फी फातिमा को गोल्ड मेडल पहनाकर उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
मख्फी फातिमा ललित कला एकेडमी की जोनल प्रदर्शनी, गुजरात की वर्कशॉप और कोच्चि में लगी इंटरनेशनल आर्ट प्रदर्शनी में भी अपनी कलाकृतियों का प्रदर्शन चुकी है। होनहार छात्रा का कहना है कि यदि डीएम मिनिस्ती एस और विनोद अग्रवाल ने उसकी मदद नहीं की होती तो आज वह इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाती। उसने अपने दोनों गोल्ड मेडल नाना आशिक अली खान को समर्पित किए है, जिनका सपना उसने पूरा किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें