विकलांगता अभिशाप नहीं, बल्कि उसे मन में धारण कर लेना अभिशाप होता है। हौसले बुलंद हों तो किसी प्रकार की विकलांगता आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती। यह साबित कर दिखाया रेलवे कर्मी दिव्यांग कृष्णकांत यादव ने। कृष्णकांत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस सोच को भी सार्थकता प्रदान की है, जिसमें पीएम ने विकलांगों को दिव्यांग नाम दिया है।
कई वर्ष पहले ट्रेन की चपेट में आकर एक पैर गंवा चुके कृष्णकांत ने हाल ही में नई दिल्ली में हुई पांच किलोमीटर की स्वच्छ भारत रन (नई दिल्ली मैराथन-2016) में भाग लिया और प्रतियोगिता में तीसरे स्थान पर रहकर कांस्य पदक जीतकर अपने जिले का मान बढ़ाया। शहर के मोहल्ला जलालनगर के रहने वाले कृष्णकांत यादव रेलवे में टीटीई हैं। वह वर्ष 2004 में रेलवे में भर्ती हुए। ड्यूटी के दौरान 16 दिसंबर 2010 को यहां स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर तीन पर वह एक ट्रेन की चपेट में आ गए थे, जिसमें उनका बायां पैर कट गया। एक पैर से विकलांग होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और जिंदगी को चुनौती के रूप में स्वीकार किया। बाद में उन्होंने कृत्रिम पैर के सहारे अपनी दिनचर्या सामान्य की।
कृष्णकांत बताते हैं कि नई दिल्ली में 28 फरवरी को होने वाली मैराथन दौड़ की जानकारी द चैलेंजिंग वंस नामक दक्षिण भारत के एक ग्रुप ने उन्हें दी। इसके लिए उन्होंने अपना पंजीकरण करा दिया। यह आयोजन जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में आईडीबीआई फैडरल लाइफ इंश्योरेंस के बैनर तले हुआ। चूंकि मैराथन में करीब पांच हजार धावक शामिल होने जा रहे थे, लिहाजा चुनौती भी बड़ी ही थी। मगर कृष्णकांत ने यी चुनौती स्वीकार की और तीसरा स्थान हासिल किया।
आयोजन समिति के डायरेक्टर नागराज एडिगा ने जब उनके गले में कांस्य पदक पहनाया और इनाम की राशि का चेक दिया तो कृष्णकांत खुशी से झूम उठे। ईश्वर चंद्र यादव और कंचन यादव के पुत्र कृष्णकांत का सपना इस मैराथन का स्वर्ण पदक जीतना है। इस उपलब्धि पर उनके विभागीय साथी ओमशिव अवस्थी, नरेंद्र त्यागी, शरद राही, तारा शुक्ला, रामचंद्र, हरिशंकर पटेल, अनुज सक्सेना, प्रमोद कुमार, राकेश मिश्रा, एसपी चावला, वीएस त्रिवेदी आदि ने हर्ष व्यक्त किया है।