शाहजहांपुर। चुनाव आयोग ने कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के चलते रैली और जनसभाओं पर 15 जनवरी तक प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बाद जनसभा या रैली होंगी, इसको लेकर संभावित प्रत्याशियों के मन में संशय है। अब संभावित प्रत्याशियों ने डिजिटल प्लेटफार्म पर वर्चुअल कैंपेनिंग शुरू कर दी है। इसको लेकर मोबाइल फ्रैंडली युवाओं और समर्थकों की टीम बनानी शुरू कर दी हैं।
वर्चुअल माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने की कवायद में संभावित प्रत्याशी जुटे हुए हैं। सोशल मीडिया के जरिये उन युवाओं और समर्थकों पर नजर रखी जा रही है, जिनके सोशल मीडिया पर एक से अधिक एकाउंट हैं और उनसे हजारों लोग जुड़े हैं। उन्हें टीम में जोड़ा जा रहा है। प्रचार दो तरीके से किया जा रहा है। एक तो संबंधित प्रत्याशी की खूबियां बताईं जा रही हैं और दूसरा विरोधी संभावित प्रत्याशी की मुखालफत में पोस्ट की जा रही हैं।
इसके अलावा दलबदल आदि अफवाहें भी फैलाई जा रही हैं। जब तक सभी पार्टियों का टिकट घोषित नहीं होता तब तक विरोधी प्रत्याशी के खिलाफ दल बदलने की अफवाह खूब जोर पकड़ रही हैं। अपने खिलाफ अफवाह उड़ते ही प्रत्याशी के समर्थक खंडन करने के लिए सक्रिय हो जाते हैं।
ग्रुपों की बदली सेटिंग
पार्टियों के संभावित प्रत्याशियों ने अपने और पार्टी के नाम पर व्हाट्सएप ग्रुप और फेसबुक पेज बना रखे हैं। इनमें जमकर प्रचार किया जा रहा है। हालांकि तमाम व्हाट्सएप ग्रुप ऐसे हैं, जिनके एडमिन राजनीति में दिलचस्पी नहीं रखते। उन्होंने स्पष्ट मैसेज कर दिया है कि ग्रुप पर राजनीतिक प्रचार-प्रसार से संबंधित पोस्ट न करें। कई ग्रुपों की सेटिंग में परिवर्तन कर ओनली एडमिन कर दिया गया है। आशंका बनी हुई है कि कहीं अनर्गल और भ्रामक पोस्ट पर एडमिन के खिलाफ ही प्रशासन कार्रवाई न कर दे। आदर्श आचार संहिता के मद्देनजर कोई झमेले में नहीं फंसना चाहता।
ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने की कोशिश
सपा, भाजपा, बसपा और कांग्रेस ने अभी सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। सपा और भाजपा से एक-एक सीट पर कई प्रत्याशी प्रचार कर रहे हैं। ये संभावित प्रत्याशी अपने विधानसभा क्षेत्र के उन लोगों का आंकड़ा जुटा रहे हैं, जिनके पास मोबाइल हैं। अगर मोबाइल एंड्राइड है और वे लोग सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर हैं तो उनसे उसी प्लेटफार्म पर संपर्क किया जाएगा। इनके पास साधारण मोबाइल है, उनके पास रिकार्डेड मैसेज पहुंचाया जाएगा।