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Shahjahanpur News: बाजार में आलू के दाम धड़ाम...टूट गई किसानों की कमर

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पुवायां में खड़ी आलू की फसल। संवाद - फोटो : 1
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पुवायां। बाजार में आलू के दाम बेहद कम होने से किसानों के सपने टूट गए हैं। धान में नुकसान के बाद अब आलू के भी समुचित दाम नहीं मिलने से किसान परेशान हैं। आलू की फसल से किसानों को उम्मीद थी कि अच्छे दाम मिलेंगे, बेहतरीन पैदावार होगी, जिससे कर्ज से निपटने के साथ ही तमाम रुके काम भी पूरे हो सकेंगे, वहीं फसल अब भारी नुकसान का कारण बन गई है। दाम में भारी गिरावट ने किसानों के अनुमान, अरमान और आकलन को ध्वस्त कर दिया है।
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पुवायां तहसील क्षेत्र में पुखराज, पुखरी, लाल आलू 7008, करोड़ा, डेलियारेड आदि किस्मों की खेती होती है। इस बार भी लगभग तीन हजार एकड़ में आलू बोया गया है। आलू का बीज किसान का अपना होने के बाद खेती पर प्रति एकड़ 60 से 65 हजार रुपये खर्च आता है। प्रति एकड़ 80 से 85 क्विंटल आलू निकलता है। गत वर्ष आलू का दाम 12 से 14 सौ रुपये प्रति क्विंटल था, इस बार दाम 500 से 550 रुपये रह गया है। ऐसे में 60 हजार रुपये लागत के सापेक्ष प्रति एकड़ 47 हजार रुपये का ही आलू निकल रहा है और किसानों को भारी घाटा हो रहा है।
किसान परगट सिंह, राजबहादुर, हंसराम, रामचंद्र आदि ने बताया कि इस बार धान भी कम निकला, आलू में भी खर्चा नहीं निकल रहा है। किसानों के लिए पूरा साल घाटे का रहा है। आलू के दाम कम रहने से किसान कर्जदार हो रहे हैं। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। (संवाद)
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मक्का के दाम गिरने से जल्दबाजी में आलू खोद रहे किसान



किसानों ने बताया कि कुछ दिन पहले बाजार में मक्का के दाम 2450 रुपये प्रति क्विंटल थे। एथेनॉल बनाने में मक्का का प्रयोग होता था। अब कंपनियों ने मक्का पर निर्भरता कम करते हुए चावल से भी एथेनॉल बनाना शुरू कर दिया है। इससे बाजार में मक्का के दाम 16 से 17 सौ रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। पुवायां क्षेत्र में मक्का भारी क्षेत्रफल में होता है, लेकिन मक्के के गिरते दाम से किसान चिंतित हैं। वे मक्का के स्थान पर गेहूं बोने में जुट गए हैं। मक्का अब सिर्फ मुर्गी दाना के लिए बिक रहा है। गेहूं बोने के कारण जल्दबाजी में आलू खोदा जा रहा है।



विदेश के लिए रैक नहीं लगने से कम हुए दाम
किसानों के अनुसार आलू श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान सहित कई देशों को जाता था। इस बार बांग्लादेश से संबंध ठीक नहीं हैं और अन्य देशों के लिए रैक नहीं लगने से आलू की मांग केवल स्थानीय बाजारों तक रह जाने से दाम गिर गए हैं। इसके अलावा पुवायां क्षेत्र में लाल आलू भी बड़े क्षेत्रफल में होता है। शाहजहांपुर, लखीमपुर, पीलीभीत, बरेली और आसपास लाल आलू की मांग बिल्कुल नहीं है। लाल आलू की नेपाल, बिहार और झारखंड में भारी मांग है। लाल आलू की आपूर्ति नेपाल हो रही है। इस कारण लाल आलू के दाम 800 से 900 रुपये क्विंटल हैं। पिछले वर्ष लाल आलू 15 से 16 सौ रुपये प्रति क्विंटल बिका था।

पुवायां तहसील क्षेत्र में कुल कोल्ड स्टोर - 12

भंडारण - 18 लाख कट्टे

आलू किसान - लगभग 25 हजार
आलू रकबा - लगभग 20 से 25 हजार एकड़
आलू उत्पादन - 85 से 90 क्विंटल प्रति एकड़

आलू इस बार दूसरे देशों में नहीं जा रहा है, इस कारण दाम बेहद गिर गए हैं। आलू में भारी घाटा हो रहा है। कच्चा आलू रोका नहीं जा सकता। इसे हर हाल में बेचना होता है।
- जोधवीर सिंह कलेर, महमूदपुर सहजनियां, पुवायां




गत वर्ष की अपेक्षा इस बार आलू के दाम एक चौथाई रह गए हैं। भारी नुकसान हो रहा है। दाम बढ़ने पर ही घाटा कम हो सकेगा। बाहर की मंडियों में लाल आलू जा रहा है। सफेद आलू की नेपाल आदि में मांग नहीं है।

- जगजीत सिंह, बरौना फार्म, पुवायां

किसान अगेती आलू की खेती करने लगे हैं। इस फसल की जल्दी खोदाई हो जाती है। अभी आलू कच्चा भी है। अधिक मात्रा में आलू बाजार में आने से भाव में गिरावट आई है। किसान फरवरी के आखिरी में आलू की खोदाई करें तो उनको अच्छा भाव मिलेगा।

- पुनीत पाठक, जिला उद्यान अधिकारी

पुवायां में खड़ी आलू की फसल। संवाद- फोटो : 1

पुवायां में खड़ी आलू की फसल। संवाद- फोटो : 1

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