बरामद लैपटॉप की जांच में खुल रहीं परतें, जो नवाबगंज में कभी नहीं रहे, उन तहसीलदारों के हस्ताक्षर का जालसाजों ने किया इस्तेमाल
बरेली। जिन तहसीलदारों की नवाबगंज में कभी तैनाती नहीं रही, जालसाजों ने उनके भी डिजिटल हस्ताक्षर से फर्जी प्रमाणपत्र जारी कर दिए। बरामद लैपटॉप की जांच में अब फर्जीवाड़े की परतें खुल रही हैं। एफआईआर में नामजद आरोपी भी अब तक गिरफ्त से दूर हैं।
जब्त किए गए लैपटॉप की जांच से पता चला है जन सुविधा केंद्र संचालक ने चार ऐसे आय-जाति प्रमाण पत्र जारी किए हैं, जिनमें उन तहसीलदारों के डिजिटल हस्ताक्षर प्रयोग हुए हैं जो स्थानांतरित हो चुके हैं या फिर कभी तैनात ही नहीं रहे। केंद्र संचालक ने जिन्हें प्रमाण पत्र दिए हैं, उनके क्रमांक भी फर्जी हैं।
तहसीलदार दुष्यंत प्रताप सिंह ने बताया कि जांच में स्पष्ट हुआ है कि नवाबगंज तहसील के सामने स्थित नेमचंद्र के जन सुविधा केंद्र से तहसीलदार महेंद्र प्रताप सिंह, रजनीश, अरविंद कुमार सिंह और दुष्यंत प्रताप सिंह के डिजिटल हस्ताक्षर से आय-जाति प्रमाण पत्र जारी हुए हैं। इन तहसीलदारों में महेंद्र प्रताप सिंह नवाबगंज तहसील में कभी भी तैनात नहीं रहे।
अरविंद कुमार सिंह वर्ष 2022 में अक्तूबर-नवंबर में करीब डेढ़ महीने जरूर रहे और रजनीश सक्सेना वर्ष 2024 में तीन महीने तक प्रभारी तहसीलदार रहे। दिसंबर 2022 में दुष्यंत प्रताप सिंह पीलीभीत जिले में तैनात थे। जन सुविधा केंद्र संचालक काफी समय से विभिन्न जिलों के तहसीलदारों के डिजिटल हस्ताक्षर कट-पेस्ट कर लोगों को आय-जाति प्रमाणपत्र बांटकर कमाई कर रहा था।
ये मामले आए सामने :
21 दिसंबर 2021 को मोहल्ला बगिया नवाबगंज की इमराना पत्नी नईम को जाति प्रमाणपत्र जारी किया। इनके प्रमाण पत्र में तहसीलदार महेंद्र प्रताप सिंह के डिजिटल हस्ताक्षर अंकित है, जबकि नवाबगंज तहसील में महेंद्र प्रताप सिंह कभी भी नहीं रहे।
13 मार्च 2024 को मुड़िया भीकमपुर के रामऔतार का आय-जाति प्रमाण पत्र जारी किया। इनके आय प्रमाणपत्र में तहसीलदार रजनीश के डिजिटल हस्ताक्षर अंकित हैं।
चार फरवरी 2025 को मोहल्ला बगिया नवाबगंज की रुखसाना बी पत्नी बबलू का जाति प्रमाणपत्र जारी किया है। इसमें तहसीलदार अरविंद कुमार सिंह के डिजिटल हस्ताक्षर अंकित है, जबकि उस समय दुष्यंत प्रताप सिंह नवाबगंज में तैनात थे।
21 दिसंबर 2022 को मोहल्ला बहोर नगला की बसंती देवी पत्नी गांधी उर्फ नरायण को जाति प्रमाणपत्र जारी किया गया। इसमें तहसीलदार दुष्यंत प्रताप सिंह के डिजिटल हस्ताक्षर अंकित है, जबकि उस समय दुष्यंत पीलीभीत जिले में तैनात थे। संवाद
प्रमाणपत्र दिए बिना ही शुरू करा दी वृद्धावस्था पेंशन मुड़िया भीकमपुर के 70 वर्षीय रामऔतार खेतीबाड़ी करते हैं। उन्होंने नायब तहसीलदार सत्यवीर सिंह को बयान दिया है कि उनकी वृद्धावस्था पेंशन बननी थी। इसमें आय प्रमाण पत्र की जरूरत थी। मार्च 2024 में उन्होंने आय प्रमाणपत्र के लिए जनसेवा केंद्र पर विजय को प्रपत्र और एक हजार रुपये दिए थे। दर्ज बयान के मुताबिक, विजय ने रामऔतार को आय प्रमाणपत्र दिए बिना ही उनकी वृद्धावस्था पेंशन बनवा दी थी।
जन सुविधा केंद्र संचालक नेमचंद्र व उसके सहयोगी विजय के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई थी। इन लोगों ने इंटरनेट से दूसरे जिलों में तैनात अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर चोरी किए हैं। केंद्र की आइडी लॉक करा दी है। उसका लैपटॉप तहसील में है।- दुष्यंत प्रताप सिंह, तहसीलदार नवाबगंज