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नदियों में गिराए जा रहे नाले से दूषित हो रहा पानी, घाटों पर गंदगी के ढेर

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शाहजहांपुर के खन्नौत नदी में जाता नाले का गंदा पानी के साथ कूड़ा । संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। नाले-नालियों का पानी अब भी नदियों में ही गिराया जा रहा है। इसकी वजह से नदियों का पानी दूषित हो रहा है। घाटों पर गंदगी फैली रहती है। इससे नदियों का पानी पीने लायक तो दूर नहाने लायक भी नहीं बचा है।
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शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा है। कार्तिक के महीने तथा गंगा स्नान के दिन शहर के पीपल घाट, बिसरात घाट तथा जिले की दक्षिणी सीमा पर स्थित ढाई घाट पर सामूहिक स्नान पूजन किया जाता है। शहर में दो प्रमुख नदियां गर्रा और खन्नौत हैं, जिनकी हालत बुरी हो चुकी है। इन नदियों में सीधा नाला डाला जा रहा है। नदियों का दूषित पानी बीमारियां फैला रहा है। लोदीपुर और हनुमतधाम पर खन्नौत नदी तथा गांधी पार्क के पास गर्रा नदी में नाले गिराए जाने से गंदगी पसरी पड़ी थी। डेयरी वाले अपनी भैंसों को नदियों में नहला रहे थे।
वैश्विक मानकों के अनुसार नदियों के पीएच लेबल का औसत सात है। जबकि आजकल अधिकांश नदियों में यह बढ़ा हुआ पाया जा रहा है। हैवी मेटल्स के कारण नदियों के पानी में ऑक्सीजन लेवल घट गया है और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। इसके कारण नदियों का जलीय जीवन नष्ट हो रहा है। ब्रिटिशकालीन गजेटियर में जिले की अनेक नदियों की चर्चा है। शहर से होकर गुजरने वाली गर्रा और खन्नौत जलीय जीवन का केंद्र थीं। इनमें मछलियां, घड़ियाल, कछुए, सरीसर्पों की भरमार थी। अनेक पक्षी इनमें अठखेलियां करते हुए देखे जाते थे। आज हालात बदल गए है। शहर में प्रवेश करते समय नदियां साफ हैं, लेकिन अंदर आते ही सड़ांध पैदा हो जाती है।
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खन्नौत नदी में खिरनीबाग और लोदीपुर की ओर से आने वाले नालों का पानी सीधे गिराया जाता है। यह कई सालों से चलता आ रहा है, जिससे नदी के घाट पर गंदगी फैली रहती है। इसकी सफाई होनी चाहिए। - विनोद यादव
हनुमतधाम पर पुल के पास से ही एक नाला खन्नौत नदी में गिरता है। इसको बंद कर आगे मजार के पास से नाला खोल दिया गया है। अब वहीं पर दूषित पानी गिरता है और गंदगी इकट्ठा हो जाती है। - रमेश कुमार
नदियों की सफाई का काम होना चाहिए। इससे घाटों पर गंदगी न फैले। हम जलालाबाद से शहर में हनुमतधाम घूमने आए और घाट पर बैठे, तो यहां फैली गंदगी के कारण बदबू ने बैठना दूभर कर दिया। - नितीश कुमार
नाले-नालियों का पानी नदियों में सीधे गिराया जाना ठीक नहीं है, इसके लिए सरकार को व्यवस्था करनी चाहिए। इससे नाले-नालियों पानी नदियों में गिरने से रोका जा सके और उनको दूषित होने से बचा सके। - रितू
दुर्गा टाकीज के पास से आने वाला नाला गांधी पार्क के करीब खुला हुआ है। नाले से आने वाला सारा गंदा पानी, मैला आदि सीधे नदी में आता है। इससे गर्रा नदी के घाट पर गंदगी फैली रहती है। बैठना मुश्किल होता है। - शिवम
नदियों में गंदा पानी छोड़ना बिल्कुल गलत है। इस पर रोक लगनी चाहिए। नदियों को साफ सुथरा रखना चाहिए। गर्रा नदी के घाट पर भी काफी गंदगी रहती है, जिससे छुटकारा मिलना ही चाहिए, ताकि नदियां बच सके। - कपिल यादव
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