शाहजहांपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में एकदम पासा पलटने से समाजवादी पार्टी की गुटबाजी और अंतर कलह उभरकर सामने आ गई है। सपा डैमेज कंट्रोल करने में जुटी है मगर भितरघात की कहानी अब सतह पर है। पूरे मामले की जानकारी सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव तक पहुंचा दी गई है। इसका दुष्परिणाम विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट मांग रहे लोगों पर पड़ सकता है।
सपा प्रत्याशी के नामांकन वापस लेने और भाजपा प्रत्याशी के निर्विरोध निर्वाचन की खबर सपा मुखिया अखिलेश यादव तक है। पार्टी में भितरघात करने वाले लोगों पर भी कार्रवाई की तैयारी है। हालांकि पार्टी अब भी सभी के एकजुट होने की बात दोहरा रही है। पार्टी प्रत्याशी रहीं वीनू सिंह ने मंगलवार को अचानक न केवल अपना नामांकन वापस ले लिया था बल्कि भाजपा की सदस्यता भी ले ली थी। वीनू सिंह के परिवार के राजनीति में सक्रिय सदस्य जलालाबाद से सपा विधायक शरदवीर सिंह के खास रहे थे। पार्टी ने बहुत सोच-समझकर उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष का प्रत्याशी बनाया था। इसके बावजूद भाजपा की रणनीति के आगे सपा गच्चा खा गई। सपा की करारी हार पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव की नजर है। दरअसल पार्टी के अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। कई धड़े बंटे हुए हैं। यहां तक कि पार्टी के क्षतिग्रस्त होने पर भी अपना फायदा तलाशा जा रहा है।
अब सपा का खुफिया तंत्र ऐसे लोगों को चिह्नित कर उनकी रिपोर्ट अखिलेश यादव तक पहुंचा रहा है। इसका असर आने वाले विधानसभा चुनाव में दिखाई देगा। विधानसभा चुनाव के लिए सपा की टिकट की जुगाड़ में लगे लोगों पर इसका प्रभाव दिखना तय है। उम्मीद है कि जल्द उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है जिन्होंने पार्टी के प्रत्याशी को यह विश्वास नहीं दिला पाया कि वह जीत सकती हैं। इसके अलावा यह समीक्षा भी की जा रही है कि अपने क्षेत्र में किन लोगों ने जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में पूरी ताकत नहीं लगाई थी।
बताया जा रहा है कि सपा के कुछ बड़े नेता अभी हवा का रुख भांप रहे हैं। सही समय आने पर भाजपा का दामन थाम सकते हैं।
पूरे मामले की रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के पास है। पार्टी एकजुट होकर विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है। हम सपा की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाकर 2022 में सरकार बनाएंगे।
-तनवीर खां, सपा जिलाध्यक्ष
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भाजपा ने चौतरफा घेरा था सपा प्रत्याशी को
सपा प्रत्याशी वीनू सिंह को अपने पाले में लाने के लिए भाजपा ने चौतरफा घेराबंदी की थी। मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने भी जोर लगाया था। हाल में भाजपाई हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने भी मदद की थी। रिश्तेदारों से भी दबाव डलवाया गया था। नामांकन के बाद से ही प्रत्याशी और राजनीति में सक्रिय उनके रिश्तेदार सपा से ज्यादा भाजपा के लोगों के संपर्क में थे। सपाई फोन पर भी उनसे संपर्क नहीं कर पा रहे थे। बताया जा रहा है कि लखनऊ में नामांकन वापसी और पार्टी सदस्यता की बात फाइनल हुई। सटीक रणनीति के बल पर भाजपा ने उन्हें अपने खेमे में लेकर सपा को चारों खाने चित कर दिया। संवाद