अमित ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि जब वह चार- पांच वर्ष का था, तभी मां किरन देवी ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। मां की मौत के कुछ समय बाद पिता बद्रीप्रसाद ने प्रेमलता से दूसरी शादी कर ली थी। सौतेली मां और उनके पुत्र संकल्प ने पूरी संपत्ति पर कब्जा कर लिया था।
उसके पिता सौतेले भाई संकल्प के साथ रहते हैं। वह चार साल से शिमला में मजदूरी कर गुजर कर रहा था। ढाई वर्ष पूर्व पुवायां आकर उसने संपत्ति में कुछ हिस्सा देने की मांग की थी, लेकिन सौतेली मां प्रेमलता और भाई संकल्प आदि ने साफ मना कर दिया था।
एक एक पैसे का मोहताज था आरोपी
वह एक एक पैसे को परेशान था। उसने कई बार पंच फैसले से संपत्ति में कुछ हिस्सा मांगा, जिससे वह ठीक से जीवन यापन कर सके और शादी कर सके। पिता बद्रीप्रसाद गुप्ता ने उसे कुछ हिस्सा देने की बात कही तो सौतेली मां और भाई ने उन्हें भी घर से निकाल दिया। पिता ढाई वर्ष तक किराए के कमरे में रहे थे।
अमित ने पुलिस को बताया कि उसकी जीवन हताशा और निराशा से भरा था। कोई सामाजिक हैसियत भी नहीं रह गई थी। इस कारण उसने संकल्प की हत्या कर अपनी सौतेली मां का वंश नाश करने की ठान ली थी।
झगड़ालू प्रवृत्ति का है अमित
संकल्प की हत्या का आरोपी अमित झगड़ालू प्रवृत्ति का है। लोगों ने बताया कि कई साल पहले उसने एक सिपाही को भी पीट दिया था। मां प्रेमलता ने उस पर और संकल्प पर लगाए आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि अमित अपना पाप छिपाने के लिए झूठ बोल रहा है। लोगों की सहानुभूति हासिल करना चाहता है। संकल्प की पत्नी पल्लवी का कहना है कि अमित को ससुर की संपत्ति से दो लाख रुपये मिले थे, जो वह स्वेच्छा से लेकर संपत्ति से अलग हो गया था।