शाहजहांपुर। सामूहिक आत्महत्या मामले में अखिलेश के परिवार को सुरक्षा मिल गई है। मंगलवार को तीन सिपाही अखिलेश के घर के बाहर तैनात कर दिए गए। पिछले कई दिनों से परिवार सुुरक्षा की मांग कर रहा था। व्यापारी संगठन भी परिवार की जान को खतरा बताकर सुरक्षा की मांग कर रहे थे। पुलिस लगातार इस प्रकरण से जुड़े कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
इधर, घटना हुए आठ दिन बीत चुके हैं लेकिन अब तक अविनाश के नाम हुई रजिस्ट्री के निरस्तीकरण की कार्रवाई तेज नहीं हो सकी है। तीन मंत्रियों से लेकर तमाम अधिकारियों से परिवार गुहार लगा चुका है।
चौक कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला कच्चा कटरा निवासी दवा व्यापारी अखिलेश गुप्ता ने सूदखोर अविनाश से प्रताड़ित होकर पत्नी, मासूम बेटा-बेटी के साथ फंदे से लटककर जान दे दी थी। अखिलेश के घर से सुसाइड नोट और डायरी बरामद होने के बाद पता चला था कि सूदखोरों के मकड़जाल में अखिलेश बुरी तरह फंस गया था। उसका घर भी सूदखोर अविनाश वाजपेयी ने अपने नाम करा लिया था। अखिलेश के पिता ने अविनाश के गैंग से परिवार को जान का खतरा बताकर सुरक्षा की मांग की थी। एसपी से लेकर तमाम नेताओं के सामने अपनी बात रखी थी। मंगलवार को एसपी एस आनन्द ने परिवार को सुरक्षा के लिए तीन पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया। अखिलेश के पिता अशोक गुप्ता का मानना है कि इतना बड़ा गैंग कोई शख्स अकेले नहीं चला सकता। पिता ने थाने में आठ जून को अविनाश के गैंग के अन्य सदस्यों के खिलाफ तहरीर दी थी। इसके बाद उस तहरीर को पुलिस ने विवेचना में शामिल कर लिया था। पुलिस ने घटना से जुड़े खुद को अखिलेश का जिगरी दोस्त बताने वाले सुशील गुप्ता और घटना से एक दिन पहले अविनाश के साथ अखिलेश के घर आकर धमकाने वाले मिथिलेश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस लगातार प्रकरण से जुड़े लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। अभी और लोगों की गिरफ्तारी संभावित है। इसमें दवा व्यापार से जुड़ा एक नाम चर्चा में है।
तीन मंत्रियों से मकान वापस कराने की मांग, मिले सिर्फ आश्वासन
अखिलेश के परिवार से मंत्री नंद गोपाल नंदी, फिर प्रभारी मंत्री कपिल देव अग्रवाल और वित्त एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने मुलाकात कर सांत्वना दी थी। परिवार ने सभी मंत्रियों से मांग की थी कि अखिलेश के घर की अविनाश ने जालसाजी करके अपने नाम रजिस्ट्री करा ली। जिसको निरस्त कराकर अखिलेश के पिता के नाम कराया जाए। परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। परिवार को आर्थिक मुआवजा भी दिया जाए। घटना के आठ दिन बाद भी परिवार को सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। अखिलेश के पिता अशोक गुप्ता ने बताया कि अभी तक उनको घर वापस करने पर क्या कार्रवाई की जा रही है, इसके बारे में कोई कुछ नहीं बता रहा है।