पुवायां। गांव कुंवरपुर जप्ती में मामा के घर रहकर पढ़ाई कर रहे छात्र अपूर्व अवस्थी ने खुद ही गोली मारकर जान दी थी। पुलिस के मुताबिक, अपूर्व के मामा प्रमोद ने जमीन संबंधी रंजिश में विपक्षियों को फंसाने के लिए हत्या की सूचना दे दी थी। पुलिस दस वर्ष पूर्व मां की हुई मृत्यु के गम में अपूर्व के आत्महत्या करने की बात कह रही है, लेकिन इतने वर्षों बाद ऐसा किया जाना किसी के गले नहीं उतर रहा।
मूलरूप से लखीमपुर के थाना मितौली के गांव भीखमपुर निवासी मनीष अवस्थी का पुत्र अपूर्व (16) लगभग दस साल से नाना राजकुमार मिश्रा के घर पुवायां के गांव कुंवरपुर जप्ती में रह रहा था। वह पुवायां में सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में दसवीं का छात्र था। बीती तीन जुलाई को शाम लगभग चार बजे मामा प्रमोद अपूर्व को सीएचसी लाए थे। उसके सीने में गोली लगी थी। डॉक्टर ने अपूर्व को मृत घोषित कर दिया था। प्रमोद ने पुलिस को बताया था कि स्कूल से घर आते समय अपूर्व को गांव के ही अमित मिश्रा, अनुज मिश्रा, आलोक मिश्रा, गौरव और विजय ने अपनी गाड़ी में गोली मार दी थी। फिर शव गांव से कुछ दूर पेट्रोल पंप के पास फेंककर चले गए।
पुलिस ने मामले को संदेह के दायरे में लेकर प्रमोद के यहां चल रहे भवन निर्माण में लगे श्रमिकों से पूछताछ की। मजदूरों ने बताया कि अपूर्व ने घर की बैठक (ड्राइंगरूम) में सोफे पर बैठकर खुद को तमंचे से गोली मारी थी। घटना के समय वे लोग घर में ही काम कर रहे थे। अपूर्व को प्रमोद अस्पताल ले गए थे। श्रमिकों के बयानों के आधार पर प्रमोद से पूछताछ की गई तो प्रमोद ने सच्चाई बयां कर दी। सीओ प्रवीण मलिक ने बताया कि प्रमोद ने बताया है कि अपूर्व अक्सर अपनी मां को याद करता था। इसी कारण उसने आत्महत्या कर ली। प्रमोद की निशानदेही पर तमंचा और अपूर्व का मोबाइल फोन बरामद कर लिया गया है
विपक्षी लिखवाते थे झूठी रिपोर्ट, इसलिए की फंसाने की कोशिश
थाना प्रभारी रवि करन सिंह के मुताबिक, प्रमोद ने बताया कि जमीन संबंधी विवाद में दूसरे पक्ष के लोग उन्हें फंसाने के लिए झूठी रिपोर्ट लिखवा देते थे। इस कारण अपूर्व की मौत के बाद उन्होंने भी विपक्षियों को फंसाने के लिए पुलिस को झूठी जानकारी देकर रिपोर्ट दर्ज करा दी थी।
पुलिस की बड़ी लापरवाही आई सामने, प्रमोद के घर की नहीं ली थी तलाशीपुवायां। अपूर्व की मौत के मामले में पुलिस की भारी लापरवाही सामने आई है। पुलिस घटना के दिन प्रमोद के घर का मुआयना कर लेती तो असलियत उसी दिन खुल सकती थी।तीन जुलाई को प्रमोद अपूर्व को मृत हालत में थाने लाए थे। प्रमोद ने बताया था कि गांव के पांच लोग अपूर्व को गोली मारने के बाद उनके सामने कार से फेंक गए। इसके बाद वह बाइक से अपूर्व को घर ले गए, तब गोली लगने का पता चला और इसके बाद वह बोलेरो से सीएचसी ले गए। प्रमोद की बाइक पर कहीं खून नहीं लगा था, इस पर पुलिस ने ध्यान ही नहीं दिया। पुलिस ने एक और बड़ी लापरवाही बरती,प्रमोद के घर के अंदर जाकर जांच करने की जरूरत नहीं समझी। पुलिस तुरंत ही घर के अंदर जांच करती तो बैठक में सोफे पर खून या फिर खून साफ करने का पता चल जाता और घटना का खुलासा हो सकता था।
खुलासा होने के बाद भी दो नामजद सहित चार अब भी हिरासत में
पुलिस ने घटना को आत्महत्या का बताकर भले ही खुलासा कर दिया है, मगर नामजद अनुज, अमित और दो अन्य लोगों को पुलिस ने थाने में ही बैठा रखा है। प्रमोद के घर काम करने वाले श्रमिक भी चार जुलाई से ही थाने में ही हैं। नामजद कराए गए लोगों का कहना है कि खुद को हत्या का चश्मदीद बताकर पांच लोगों पर रिपोर्ट दर्ज कराने वाले प्रमोद पर पुलिस ने अभी कार्रवाई नहीं की है।
सीने पर गोली क्यों मारी... कई सवालों के नहीं मिल रहे जवाब
अपूर्व ने भले ही आत्महत्या के लिए गोली सीने पर क्यों चलाई, इसका पुलिस भी जवाब नहीं दे पा रही है। आमतौर पर खुदकुशी करने वाला कनपटी पर ही गोली मारता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह तो स्पष्ट हो गया है कि गोली सटाकर मारी गई, मगर ऐसा तब भी संभव हो सकता है जब कोई और गोली चलाए। साथ ही यह बात भी किसी के गले नहीं उतर रही है कि मां की मौत के दस वर्ष बाद गम में अपूर्व ने खुदकुशी की। गांव में भी लोग अपूर्व के आत्महत्या करने पर तमाम चर्चाएं कर रहे हैं और पुलिस का बताया कारण सही नहीं बता रहे हैं।
अपूर्व ने आत्महत्या की थी। घटना का खुलासा हो गया है। मुकदमा आज ही एक्सपंज किया जाएगा और पूरे मामले की रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की जाएगी। कोर्ट चाहे तो वादी को तलब कर सकता है।
-प्रवीण मलिक, सीओ पुवायां