शाहजहांपुर। चुनावी रण में कब दोस्त दुश्मन और और कब दुश्मन दोस्त बन जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता। 2022 के चुनावी चौसर की गोटियों में फेरबदल से सबसे ज्यादा प्रभाव तिलहर और जलालाबाद की सीट पर पड़ा है। भाजपा से स्वामी प्रसाद मौर्या की सपा में एंट्री ने समीकरणों में बड़ा उलटफेर किया। राजनीतिक दुश्मन अचानक दोस्त में तब्दील हो गए। जिसके खिलाफ प्रचार किया जा रहा था, अब उनसे गलबहियां हो रही हैं। राजनीति के मैदान में सेनापति ने सेनाएं बदल दीं और अब उनके सामने बगावत का संकट गहराया हुआ है।
रोशनलाल की एंट्री ने बदले चेहरे
तिलहर सीट पर तकरीबन साल भर से सलोना राम कुशवाहा सपा से टिकट के लिए प्रयासरत थीं। वह लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहीं। इस सीट पर अचानक भाजपा से सपा में आए विधायक रोशनलाल वर्मा को टिकट दिए जाने पर समीकरणों में नया फेरबदल आ गया। रोशनलाल वर्मा की ‘नए घर’ में एंट्री के बाद अड़चनों का सामना करना पड़ा। सलोना कुशवाहा के साथ ही समाजवादी पार्टी के कई लोगों ने पार्टी छोड़ दी। सलोना ने रोशनलाल वर्मा पर अपने आवास पर हमला कराने का आरोप भी लगाया था। सबसे मुखर तिलहर विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष राजीव वर्मा रहे। उन्होंने रोशनलाल वर्मा पर तमाम आरोप लगाते हुए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र भी भेजा था। इसके बाद राजीव वर्मा के साथ कई सपाई भाजपा में शामिल हो गए थे।
भाजपा ने मौके का लाभ उठाते हुए सलोना कुशवाहा को प्रत्याशी बना दिया। अब भी रोशनलाल वर्मा और सलोना कुशवाहा आमने-सामने हैं, बस दल बदल गए हैं। रोशनलाल वर्मा दो बार बसपा से विधायक रहे फिर तीसरी बार विधायक बनने के लिए भाजपा का दामन थामा। फिर सपा में शामिल होकर चौथी बार विधायकी के लिए प्रयास कर रहे हैं जबकि सलोना कुशवाहा का यह पहला चुनाव है। माना जा रहा है कि रोशनलाल वर्मा को प्रत्याशी बनाने के बाद कुछ सपाई अंदरखाने सलोना कुशवाहा का समर्थन कर सकते हैं। सलोना ने भी लंबे समय तक सपा में रहकर अपनी पकड़ मजबूत की है।
जलालाबाद में नीरज और शरदवीर ने बदला पाला
स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ भाजपा छोड़कर सपा का दामन थामने वाले पूर्व विधायक नीरज मौर्य भी बसपा से विधायक थे। दो बार बसपा से लगातार विधायक रहे नीरज मौर्य 2017 का चुनाव हारने के बाद भाजपा में शामिल हो गए थे। 2022 के चुनाव में वह भाजपा से टिकट मांग रहे थे। टिकट न मिलने के अंदेशे में उन्होंने साइकिल की सवारी कर ली। सिटिंग विधायक शरदवीर अंतिम समय तक टिकट मिलने का इंतजार करते रह गए।
वहीं रोशनलाल वर्मा के सपा में जाने के बाद भाजपा के सामने लोध बिरादरी का बड़ा चेहरा सामने लाने का संकट था। इस पर भाजपा ने जलालाबाद से अपने जिलाध्यक्ष हरिप्रकाश वर्मा को उतार दिया। जलालाबाद से टिकट मांग रहे अनिल वर्मा ने प्रत्याशी फाइनल होने के बाद सपा का दामन थाम लिया। अब वह अपनी ही बिरादरी के हरिप्रकाश वर्मा के सामने सपा प्रत्याशी की मदद कर रहे हैं। वहीं शरदवीर ने सपा छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद उसके प्रत्याशी को हराने के लिए पूरा जोर लगा दिया है।
2017 में भाजपा से चुनाव लड़े मनोज कश्यप का देहांत होने के बाद उनकी पत्नी सरोज कश्यप भी टिकट की दावेदार थीं। मगर टिकट हरिप्रकाश वर्मा को मिला। हरिप्रकाश वर्मा ने राजनीतिक एकजुटता का संदेश देने के लिए सरोज कश्यप को नामांकन में अपना प्रस्तावक बनाया। अन्य टिकट के दावेदारों को भी हरिप्रकाश अपने साथ लेकर चल रहे हैं।