जलालाबाद। रामगंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि की आशंका में कोलाघाट का पैंटून पुल बुधवार से तोड़ने का काम शुरू कर दिया गया। परौर क्षेत्र को जोड़ने वाले हैदलपुर घाट पर बना पैंटून पुल दस दिन पहले ही तोड़ा जा चुका है। अब कलान व मिर्जापुर क्षेत्र के लोगों को नदी पार करने के लिए मजबूरी में नाव से जोखिम भरा सफर करना होगा क्योंकि पक्के पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। लोगों को अब नाव का सहारा रह जाएगा या तीस से चालीस किमी का फेर झेलना होगा।
बीते वर्ष 29 नवंबर को कोलाघाट के पक्के पुल का एक पिलर धंसने से यह क्षतिग्रस्त हो गया था। तब से कोलाघाट के पुल से आवागमन बंद हो गया था। जन सामान्य की परेशानी को देखते हुए लोक निर्माण विभाग ने वहां पैंटून पुल बनवा दिया था। बाद में लोनिवि मंत्री जितिन प्रसाद ने कई बार कोलाघाट का दौरा किया और पैंटून पुल के दोनों ओर एप्रोच रोड बनवा दी ताकि बलुई दलदली मिट्टी में वाहन नहीं फंसें। उनके निर्देश पर लोनिवि ने 15 जून से पुल हटाने का काम टाल दिया क्योंकि इससे लोगों को आवागमन में कठिनाई होती।
इधर, बारिश शुरू होने पर नदियों, विशेषकर रामगंगा में लगातार बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए लोनिवि ने पैंटून पुल हटाने की तैयारी कर ली। डीएम से निर्देश मिलने के बाद लोनिवि निर्माण खंड-1 के अधिशासी अभियंता राजेश चौधरी ने बुधवार से पुल तोड़कर उसके पैंटून नदी के किनारे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का काम शुरू करा दिया। लोनिवि के क्षेत्रीय अवर अभियंता ज्ञानेंद्र शर्मा के अनुसार कोलाघाट में रामगंगा नदी के पक्के पुल पर जब तक यातायात शुरू नहीं होगा, राहगीरों को असुविधा से बचाने के लिए वहां विभाग की ओर से स्टीमर की व्यवस्था कराई जाएगी।
नाव या राजेपुर होकर आने-जाने का बचा विकल्प
- कोलाघाट का पैंटून पुल टूटने के बाद कलान, मिर्जापुर से लेकर पड़ोसी जनपद बदायूं तक पहुंचने के लिए क्षेत्र के लोगों को अब कोला गांव के पास नदी को नाव से पार करने का जोखिम उठाना होगा या फिर लंबी दूरी के रास्ते के विकल्प चुनना होगा जो जनपद फर्रुखाबाद के राजेपुर और अमृतपुर से होते हुए मिर्जापुर पहुंचता है। अलग-अलग रास्तों से यह फेर करीब 40 किमी या उससे ज्यादा पड़ना तय है। बल्कि इन रास्तों से निकलने को निजी वाहन की भी जरूरत होगी।
पुल गिरने से ठप हुआ था बसों का संचालन
- कोलाघाट का पक्का पुल रहते बदायूं से शाहजहांपुर के कलान व मिर्जापुर को जोड़ते हुए संचालन व्यवस्थित हो गया था। कई हजार यात्री इस रूट पर यात्रा करते थे। कई रोडवेज बसें इस रोड पर चलती थीं जो पुल गिरने के बाद बंद हो गया। हालांकि कुछ बसें फर्रुखाबाद जिले की सीमा के कस्बों से होकर आती जाती हैं जिसमें काफी फेर पड़ता है। ऐसे में सैकड़ों स्थानीय लोग बाइक या साइकिल आदि से संपर्क मार्गों से सफर बेहतर समझते हैं।