सपा प्रत्याशी नीतू और भाजपा समर्थित अजय ने वापस नहीं ली उम्मीदवारी
- 48 वार्ड मेंबर बृहस्पतिवार को मतदान से करेंगे दोनों के भाग्य का फैसला
- नाम वापसी के मद्देनजर कलक्ट्रेट में दिन भर रही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
बता दें कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के अराजनीतिक चुनाव को सियासी तूल उस वक्त मिला जब सपा नेतृत्व ने निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष नीतू सिंह को पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया। इसी के साथ अन्य पार्टियों के खेमों में भी प्रत्याशी तय करने की कवायद शुरू हो गई। अपवाद के तौर पर कांग्रेस खेमा जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव से दूर रहा, लेकिन भाजपा और बसपा खेमे में संभावित प्रत्याशी को लेकर हलचलें बढ़ गई थीं।
यह अलग बात रही कि बसपा नेतृत्व ने नामांकन के दिन कोई प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतारा। भाजपा की कोर कमेटी ने भी किसी प्रत्याशी के नाम पर सहमति की मोहर नहीं लगाई। नतीजे में भाजपा के जिलाध्यक्ष और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्र पाल सिंह यादव के बेटे अजय यादव ने पार्टी समर्थित प्रत्याशी के तौर पर नामांकन कराकर अध्यक्ष पद के लिए दावा ठोंक दिया। अजय के नामांकन में बसपा के एमएलसी जयेश प्रसाद के निकटस्थ जिला पंचायत सदस्य पति सुधाकर त्रिपाठी के शामिल रहने से उसी दिन स्पष्ट हो गया कि प्रसाद भवन का समर्थन मिलने से न तो एमएलसी के भाई जीवेश प्रसाद चुनाव लड़ेंगे और न ही बसपा खेमा अपना कैंडीडेट चुनाव मैदान में लाएगा।
यही हुआ भी, इन्हीं दोनों प्रत्याशियों के नामांकन के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि यदि कोई एक प्रत्याशी मैदान से हटा तो निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नाम वापसी की प्रक्रिया के लिए सुरक्षा के लिहाज से अभेद्य दुर्ग में तब्दील कलक्ट्रेट कैंपस के डीएम न्यायालय कक्ष में सुबह से शाम तक सारे अफसर जमा रहे, लेकिन दोनों प्रत्याशियों में कोई भी नाम निर्देशन पत्र वापस लेने नहीं आया। एडीएम प्रशासन मुनेंद्र नाथ उपाध्याय ने बताया कि निर्विरोध निर्वाचन की संभावना खत्म हो जाने के कारण जिपं अध्यक्ष पद के लिए मतदान सात जनवरी को दिन में 11 बजे से अपराह्न तीन बजे तक कराया जाएगा और इसके तुरंत बाद मतगणना शुरू हो जाएगी।