फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दोबारा आरक्षण से फिर बिगड़े समीकरण, मिलने लगी आपत्तियां

विज्ञापन
विज्ञापन
शाहजहांपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए वर्ष 2015 को आधार मानकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेशानुसार ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत के वार्डों को लेकर दोबारा तय किए गए आरक्षण से दावेदारों का चुनावी समीकरण फिर बिगड़ गया। आरक्षण की अनंतिम सूची जारी होने पर आपत्तियां आने लगी हैं। दावेे और आपत्तियां लेने के लिए संबंधित कार्यालय रविवार को अवकाश को भी खुले रहे।
विज्ञापन

तीन मार्च को जारी हुई आरक्षण सूचियों पर 600 से अधिक आपत्तियां प्राप्त हुई थीं। दोबारा आरक्षण सूचियां जारी होने पर रविवार शाम तक जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय को आपत्तियां मिलने का क्रम शुरू हो यगा। आपत्तियां लेने के साथ निर्वाचन संबंधी कार्य करने के लिए कलक्ट्रेट परिसर स्थित पंचस्थानीय चुनावालय में अधिकारी और कर्मचारी रविवार को भी मौजूद रहे। उधर, डीपीआरओ दफ्तर में कर्मचारी संत कुमार दिनभर प्राप्त होने वाली आपत्तियां रजिस्टर पर दर्ज करते रहे। रविवार को डीपीआरओ दफ्तर को प्रधान पदों से संबंधित आठ आपत्तियां मिलीं। इनमें कलान ब्लॉक की चार और ददरौल, पुवायां, मदनापुर और भावलखेड़ा ब्लॉक की एक-एक आपत्ति शामिल है।
सिंधौली ब्लॉक के अनावा गांव से आए मुजम्मिल खां, असलम नबी, चमन खां, राजेश सिंह आदि ने डीपीआरओ कार्यालय को दिए लिखित प्रतिवेदन में कहा कि गांव में सामान्य श्रेणी के 1200 और पिछड़ा वर्ग के 300 वोट हैं, लेकिन प्रधान की सीट सामान्य से बदलकर पिछड़ा वर्ग को आरक्षित कर दी गई। इसी दौरान भावलखेड़ा ब्लॉक के बहादुरपुर जमी में अहमदनगर गांव से आए सर्वेश कुमार ने लिखित आपत्ति दाखिल कर कहा कि उनके गांव में प्रधान पद सामान्य या फिर अनुसूचित श्रेणी के लिए आरक्षित होना चाहिए क्योंकि 2200 मतदाताओं में 70 फीसदी अनुसूचित जाति के हैं।
विज्ञापन

जन सामान्य की बात
बार-बार आरक्षण में बदलाव से अनारक्षित वर्ग को नुकसान हो रहा है। अनारक्षित सीट पर हर कोई प्रत्याशी हो सकता है जबकि आरक्षित सीट पर उसी वर्ग के लोग लड़ सकते हैं। पूरी तैयारी के साथ चुनाव के लिए जनसंपर्क किया था, लेकिन आरक्षण बदलने से सब गुड़ गोबर हो गया। - यीशू सिंह तोमर, मरेना (जैतीपुर)
आरक्षण को जब से लागू किया तब से आधार वर्ष मानकर आरक्षण लागू किया जाना चाहिए। वर्ष 2015 को आधार मानना अन्यायपूर्ण है। हमारी ग्राम पंचायत में 2010 में आरक्षण अनुसूचित जाति के लिए था, अब फिर से वही है। पहले से तैयारी करने वाले प्रत्याशी हताश हैं।
- राधारमण पाठक, मरुआझाला (जैतीपुर)
हाईकोर्ट के निर्देशानुसार सरकार ने जो आरक्षण लागू किया, उसमें भी बहुत दोष हैं। सरकार द्वारा पहले लागू किए गए आरक्षण के आधार पर प्रत्याशियों ने अपनी तैयारी की जनसंपर्क किया। दोबारा आरक्षण लागू होने से सब प्रयास व्यर्थ हो गए। आरक्षण में बदलाव की आवश्यकता है ।
-अजय विक्रम सिंह, खेड़ाबझेड़ा (जैतीपुुर)
दोबारा से जो आरक्षण लागू किया गया है उसमें कुछ असहमतियां अभी बरकरार हैं। उन लोगों को दिक्कत हुई है जो पहले से तैयारी कर चुके थे, लेकिन अब उन्हें भी मौका मिल गया जो आस लगाए बैठे थे कि उनकी सीट पर आरक्षण बदल जाए। ऐसे लोग पंचायत का प्रतिनिधित्व करने को आतुर हैं। - धर्मेन्द्र गुप्ता, जैतीपुर
संविधान में प्रत्येक नागरिक को समानता और स्वयं समेत अपने समाज का नीतिगत तरीके से विकास करने से संबंधित तमाम प्रावधान किए हैं। इसका लाभ भी हुआ है, लेकिन पंचायत चुनाव में सरकार अपने मन मर्जी से नये नए नियम लागू कर रही है जो उचित नहीं है।
- राजेंद्र सिंह गुर्जर, करकौर (जैतीपुर)
मंगलवार शाम तक आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। बाद में 24 व 25 मार्च को डीएम की अध्यक्षता में गठित समिति उनका निस्तारण करेगी। न्यायालय के आदेश पर दोबारा आरक्षण तय करने में पूरी सावधानी बरती गई है। चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों द्वारा आपत्तियां प्रस्तुत करना स्वाभाविक है, लेकिन उनका निस्तारण नियमों और शासकीय निर्देशों के दायरे में किया जाएगा। - पवन कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें